Karnataka कर्नाटक: मैसूर जिले में एक ईंट भट्ठे से कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी में फंसे 18 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। यह कार्रवाई टी. नरसीपुरा तालुक के बेवानाहल्ली गांव में की गई, जहां प्रशासनिक टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर मजदूरों को मुक्त कराया। इस मामले में ईंट भट्ठे के तीन मालिकों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान यथिराज, गिरीश और महादेव के रूप में हुई है। इन सभी पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने मजदूरों को लंबे समय तक बंधुआ मजदूरी में रखा और उनसे जबरन काम करवाया। प्रारंभिक जांच के अनुसार, कुछ मजदूरों को 4 से 20 साल तक इस स्थिति में रखा गया था।
रेस्क्यू किए गए कुल 18 मजदूरों में से 16 लोग आसपास के गांवों के रहने वाले हैं, जबकि दो मजदूर तमिलनाडु के वेल्लोर जिले से हैं। इन सभी को कथित तौर पर बंधक बनाकर ईंट भट्ठे पर काम कराया जा रहा था।
इस पूरे अभियान को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, तहसीलदार, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया। इस कार्रवाई में स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों ‘विकासना’ और ‘मडिलु’ की भी अहम भूमिका रही, जिन्होंने प्रशासन को इस स्थिति की जानकारी दी थी।
NGO की सूचना के बाद अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की और साक्ष्य मिलने पर तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला और आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
इस मामले में बन्नूर पुलिस स्टेशन में गुलाम प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें मानव तस्करी और जबरन श्रम से जुड़े गंभीर आरोप शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मजदूरों से बिना उचित वेतन और बुनियादी सुविधाओं के लंबे समय तक काम कराया जा रहा था। कई मजदूरों को बाहर जाने या संपर्क करने की अनुमति भी नहीं थी।
जिला प्रशासन ने सभी रेस्क्यू किए गए मजदूरों के लिए अस्थायी आवास की व्यवस्था की है। इसके साथ ही प्रत्येक मजदूर को रिहाई प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने सभी पीड़ितों को शुरुआती सहायता के तौर पर 30,000 रुपये मुआवजा देने की भी पहल की है।
अधिकारियों ने बताया कि आगे की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की स्थिति मौजूद है।
कुल मिलाकर, मैसूर की यह कार्रवाई बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिसने एक बार फिर इस गंभीर सामाजिक समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है।