Bengaluru कचरा प्रबंधन व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ी उजागर

Update: 2026-06-19 06:35 GMT

Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु शहर की कचरा संग्रहण व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। बेंगलुरु नॉर्थ सिटी कॉरपोरेशन (BNCC) के अचानक किए गए निरीक्षण में यह खुलासा हुआ कि कई ऑटो टिपर, जिन्हें दस्तावेजों और मोबाइल ऐप पर सक्रिय दिखाया जा रहा था, वे वास्तव में मौके पर मौजूद ही नहीं थे। इस घटना ने शहर की अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह मामला तब सामने आया जब नागरिकों की लगातार शिकायतों के बाद नगर प्रशासन ने औचक जांच का निर्णय लिया। बेंगलुरु उत्तरी नगर निगम के आयुक्त Pommala Sunil Kumar ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए चार विशेष टीमों का गठन किया। इन टीमों ने गुरुवार सुबह विभिन्न वार्डों में स्थित ऑटो मर्जिंग पॉइंट्स पर अचानक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान कई वार्डों में वास्तविक और रिकॉर्डेड वाहनों की संख्या में बड़ा अंतर पाया गया। वार्ड संख्या 59 में मोबाइल ऐप पर 24 ऑटो टिपर सक्रिय दिखाए गए थे, लेकिन मौके पर केवल 21 वाहन ही मौजूद मिले। इसी तरह वार्ड 49 में 25 में से सिर्फ 10 वाहन ही पाए गए, जो रिकॉर्ड के मुकाबले काफी कम था।

वार्ड 27 में स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहां 35 दर्ज वाहनों में से केवल 17 वाहन ही निरीक्षण के दौरान उपस्थित थे। वहीं वार्ड 24 में 31 वाहनों के रिकॉर्ड के मुकाबले सिर्फ 18 वाहन ही मौके पर मिले। इन आंकड़ों ने नगर निगम की निगरानी प्रणाली की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिला है कि कुछ ऑटो टिपर केवल दस्तावेजों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय दिखाए जा रहे थे, जबकि वास्तविक रूप से वे कचरा संग्रहण कार्य में शामिल नहीं थे। इस प्रकार की गड़बड़ी से न केवल कचरा प्रबंधन प्रभावित हो रहा है, बल्कि नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पूरे सिस्टम की समीक्षा कर डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की योजना भी बनाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कचरा प्रबंधन जैसी आवश्यक सेवाओं में इस तरह की खामियां जारी रहीं, तो इसका सीधा असर शहर की स्वच्छता और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा। इसलिए निगरानी प्रणाली को पारदर्शी और तकनीकी रूप से अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है।

फिलहाल नगर निगम ने सभी वार्डों में पुनः सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है और वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है।

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