बेंगलुरु: ग्रेटर बैंगलोर अथॉरिटी (GBA) ने बुधवार को शहर के व्यस्त K.R. मार्केट फ्लाईओवर के नीचे बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान सड़क और फुटपाथ पर बने अस्थायी स्टॉल, अवैध निर्माण और अन्य कब्जों को हटाया गया। अभियान के दौरान कई स्ट्रीट वेंडर भावुक हो गए और अपनी रोजी-रोटी छिनने की चिंता में रोते नजर आए।
अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान सार्वजनिक सड़कों और पैदल यात्रियों के लिए बने फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से चलाया गया था। GBA का कहना है कि लंबे समय से बाजार क्षेत्र में सड़क और फुटपाथ पर अवैध कब्जों के कारण आम लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही थी। इसी समस्या को देखते हुए प्रशासन ने कार्रवाई करने का फैसला लिया।
अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। मशीनों की मदद से स्ट्रीट वेंडरों द्वारा बनाए गए अस्थायी ढांचों, दुकानों और अन्य अवैध निर्माणों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, ताकि अभियान को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सके।
GBA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों और फुटपाथों का इस्तेमाल आम जनता की सुविधा के लिए होना चाहिए, न कि स्थायी या अस्थायी कब्जों के लिए।
अधिकारी के मुताबिक, K.R. मार्केट इलाके में सैकड़ों स्ट्रीट वेंडरों ने सड़क और फुटपाथ के हिस्सों पर कब्जा कर रखा था। इसके कारण पैदल चलने वालों को चलने में परेशानी होती थी और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी। खासकर सिटी मार्केट जंक्शन के आसपास वाहनों की आवाजाही में बाधा आने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण के कारण शहर के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में भीड़ और जाम की समस्या बढ़ रही थी। फुटपाथ पर दुकानों के फैलने से पैदल यात्रियों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता था, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता था।
हालांकि, कार्रवाई के दौरान प्रभावित स्ट्रीट वेंडरों ने अपनी परेशानियां भी सामने रखीं। कई छोटे व्यापारियों ने कहा कि फुटपाथ या सड़क किनारे लगाई गई छोटी दुकानों से ही उनका परिवार चलता है। कार्रवाई के बाद उनके सामने आय का संकट खड़ा हो गया है। कुछ विक्रेता अपनी दुकानें टूटते देखकर भावुक हो गए और प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रशासन को उनके लिए उचित स्थान उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि वे अपनी आजीविका जारी रख सकें। उनका कहना है कि अचानक दुकानें हटने से उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब GBA ने K.R. मार्केट क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया है। कुछ सप्ताह पहले भी अधिकारियों ने इस इलाके में कार्रवाई की थी और व्यापारियों को चेतावनी दी थी कि वे फुटपाथ और मुख्य सड़कों पर कारोबार न करें।
प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सार्वजनिक स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने और पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के लिए ऐसी कार्रवाई जरूरी है।
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े शहरों में सड़क और फुटपाथ का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है। जहां एक ओर अतिक्रमण हटाना यातायात और सार्वजनिक सुविधा के लिए आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर छोटे व्यापारियों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए।
बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सार्वजनिक स्थानों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह शहर की सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने के साथ-साथ छोटे कारोबारियों के हितों का भी संतुलन बनाए।
फिलहाल GBA ने संकेत दिया है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है। प्रशासन का लक्ष्य शहर की सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित बनाना है, ताकि आम नागरिकों को बेहतर सुविधा मिल सके।