मैसूर। कर्नाटक के विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव के दौरान बुधवार, 21 अक्टूबर को एक अप्रत्याशित घटना सामने आई, जब राज्य सरकार के तीन मंत्रियों को पुलिस ने मुख्य समारोह स्थल की ओर जाने से रोक दिया। इस दौरान कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदगी और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बीच तीखी बहस हो गई। मंत्री ने अपनी पहचान बताते हुए पुलिस अधिकारी से सवाल किया कि उन्हें कार्यक्रम में जाने से कैसे रोका जा सकता है। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

यह घटना उस समय हुई जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मैसूर दशहरा उत्सव के मुख्य आकर्षण जंबू सवारी के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मंच की ओर जा रहे थे। मुख्यमंत्री के साथ कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदगी, मुजराई मंत्री केएस बसवंथप्पा और कृषि मंत्री पीएम नरेंद्र स्वामी भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री के आगे निकलने के बाद एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने पीछे आ रहे तीनों मंत्रियों को रोक दिया। अधिकारी ने कहा कि उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं है। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।

मुख्यमंत्री के आगे निकलते ही मंत्रियों को रोका

जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार जंबू सवारी के शुभारंभ और देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के लिए निर्धारित मंच की ओर बढ़ रहे थे।

उनके पीछे राज्य सरकार के तीन मंत्री भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आगे बढ़ रहे थे। मुख्यमंत्री के प्रवेश करने के बाद वहां तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंत्रियों का रास्ता रोक दिया।

पुलिस अधिकारी ने मंत्रियों से कहा कि उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं है। इस पर मंत्रियों ने आपत्ति जताई और बताया कि वे राज्य सरकार के मंत्री हैं तथा आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं।

इसके बावजूद अधिकारी ने उन्हें कुछ समय के लिए आगे बढ़ने से रोके रखा। इस दौरान मौके पर असहज स्थिति पैदा हो गई।

संस्कृति मंत्री ने जताई नाराजगी

पुलिस द्वारा रोके जाने पर कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदगी नाराज हो गए। उन्होंने अधिकारी के सामने अपनी पहचान बताते हुए कहा, "मैं संस्कृति मंत्री हूं।"

मंत्री ने सवाल उठाया कि राज्य सरकार के आधिकारिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में उन्हें प्रवेश करने से कैसे रोका जा सकता है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंत्री ने पुलिस अधिकारी के रवैये पर आपत्ति जताई और आगे बढ़ने का प्रयास किया।

इसके बाद पुलिस अधिकारी ने मुजराई मंत्री केएस बसवंथप्पा और कृषि मंत्री पीएम नरेंद्र स्वामी को भी रोक दिया। इस दौरान मंत्रियों और पुलिस के बीच कुछ देर तक बहस होती रही।

मुख्यमंत्री के इशारे के बाद सुलझा मामला

कार्यक्रम स्थल पर जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पीछे हो रहे घटनाक्रम की जानकारी हुई तो उन्होंने मुड़कर पुलिसकर्मियों की ओर इशारा किया।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद तीनों मंत्रियों को आगे जाने दिया गया। इसके बाद मंत्री समारोह स्थल तक पहुंचे और कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस तरह कुछ समय तक चली असहज स्थिति समाप्त हो गई और दशहरा समारोह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ा।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पुलिस अधिकारी ने मंत्रियों को किस विशेष सुरक्षा निर्देश या प्रोटोकॉल के आधार पर रोका था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

मंत्रियों और पुलिस अधिकारी के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

वीडियो में मुख्यमंत्री के आगे बढ़ जाने के बाद मंत्रियों को प्रवेश मार्ग पर रोके जाने और उनके द्वारा पुलिस अधिकारी से आपत्ति जताए जाने के दृश्य सामने आए हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि सरकार के आधिकारिक समारोह में शामिल होने पहुंचे मंत्रियों को प्रवेश से क्यों रोका गया। वहीं कुछ लोगों ने बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश संबंधी नियमों के पालन को आवश्यक बताया।

फिलहाल संबंधित पुलिस अधिकारी या वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस घटना के बारे में विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

मैसूर दशहरा का मुख्य आकर्षण है जंबू सवारी

कर्नाटक का मैसूर दशहरा देश के प्रसिद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इस उत्सव में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक भाग लेते हैं।

दशहरा उत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण जंबू सवारी होता है। इसमें देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को पारंपरिक तरीके से सजाए गए हाथी पर स्थापित कर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।

इस आयोजन में कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं, लोक कलाएं और ऐतिहासिक विरासत देखने को मिलती हैं।

इस वर्ष मैसूर दशहरा उत्सव 11 से 21 अक्टूबर तक आयोजित किया गया। विजयादशमी के दिन 21 अक्टूबर को जंबू सवारी मुख्य कार्यक्रम के रूप में आयोजित हुई।

मुख्यमंत्री ने देवी चामुंडेश्वरी को अर्पित किए पुष्प

पुलिस और मंत्रियों के बीच हुए विवाद के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने निर्धारित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया।

मुख्यमंत्री ने देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और पारंपरिक जंबू सवारी को रवाना किया।

कार्यक्रम में कर्नाटक सरकार के मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

मैसूर के पूर्व शाही परिवार के प्रतिनिधि एवं सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार भी समारोह में शामिल हुए।

समारोह के दौरान देवी चामुंडेश्वरी की पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

वीआईपी सुरक्षा और समन्वय पर उठे सवाल

घटना के बाद बड़े सरकारी आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्यमंत्री और अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में प्रवेश संबंधी व्यवस्थाएं पहले से तय की जाती हैं।

ऐसे आयोजनों में पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आमंत्रित अतिथियों के प्रवेश में अनावश्यक बाधा न आए।

हालांकि, पुलिसकर्मियों को निर्धारित सुरक्षा निर्देशों का पालन कराना भी आवश्यक होता है।

इस मामले में विवाद किस कारण उत्पन्न हुआ, इसकी स्थिति संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

उत्सव के बीच चर्चा का विषय बना विवाद

विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव में जहां श्रद्धालु और पर्यटक भव्य जंबू सवारी का आनंद ले रहे थे, वहीं मंत्रियों और पुलिस अधिकारी के बीच हुई बहस चर्चा का विषय बन गई।

घटना के दौरान मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से मामला जल्द सुलझ गया और कार्यक्रम में कोई बड़ी बाधा नहीं आई।

फिलहाल इस मामले में किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

मैसूर दशहरा के इस घटनाक्रम ने बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा प्रोटोकॉल, जनप्रतिनिधियों के प्रवेश और पुलिस-प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है।

Tags: