बेंगलुरु। देश में सरकारी नौकरी की अवधि और बेरोजगारी को लेकर केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने एक बड़ा प्रस्ताव सामने रखा है। उन्होंने सुझाव दिया है कि सरकारी कर्मचारियों की सेवा अवधि को मौजूदा लगभग 35 वर्षों के बजाय 10 से 15 साल तक सीमित करने पर विचार किया जाना चाहिए। कुमारस्वामी का मानना है कि ऐसा करने से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों में अवसर मिल सकते हैं और हर परिवार को कम से कम एक सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।केंद्रीय मंत्री ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में सुधार की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के साथ खुली बातचीत के दौरान यह विचार रखा। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की समस्या को दूर करने के लिए परंपरागत व्यवस्थाओं से अलग सोचने की जरूरत है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फिलहाल एक सुझाव है, न कि सरकार द्वारा लागू किया गया कोई नया नियम।
35 साल की सरकारी नौकरी को 15 साल करने का सुझाव
कुमारस्वामी ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में सरकारी नौकरी पाने वाला व्यक्ति आमतौर पर 30 से 35 साल तक सेवा करता है। इस लंबे कार्यकाल के दौरान दूसरे योग्य उम्मीदवारों को उसी पद पर अवसर मिलने में काफी समय लग जाता है।उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकारी सेवा की अवधि 10, 15 या 20 वर्ष तक सीमित कर दी जाए, तो अधिक लोगों को रोजगार देने की संभावना बढ़ सकती है।कुमारस्वामी के मुताबिक, कम अवधि की नौकरी के बाद कर्मचारी को सेवानिवृत्ति लाभ दिए जा सकते हैं और खाली होने वाले पदों पर दूसरे युवाओं की नियुक्ति की जा सकती है।
हर परिवार को एक सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था के बारे में विचार करना है, जिसमें अधिक से अधिक परिवारों तक सरकारी रोजगार के अवसर पहुंच सकें।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक व्यक्ति को 35 वर्षों तक सरकारी सेवा में रहने का अवसर मिलता है, तो उन लाखों युवाओं का क्या होगा, जिन्हें नौकरी नहीं मिल पाती।कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी सोच प्रत्येक परिवार को कम से कम एक सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने की है। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसी औपचारिक सरकारी योजना की घोषणा नहीं हुई है।उन्होंने युवाओं से इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर चर्चा करने और अपने सुझाव देने की अपील की।
सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन देने का भी प्रस्ताव
कुमारस्वामी ने कहा कि कम अवधि की सरकारी सेवा व्यवस्था लागू होने पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी होगा।उन्होंने ऐसे कर्मचारियों के लिए हर महीने लगभग 8,000 से 10,000 रुपये की पेंशन का विचार भी रखा।इसके अलावा उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद कर्मचारी निजी क्षेत्र में नौकरी या अन्य रोजगार कर सकते हैं।इस तरह सरकारी पदों पर नए उम्मीदवारों को अवसर मिलने के साथ पूर्व कर्मचारियों की आय का भी एक साधन बना रह सकता है।
मौजूदा कर्मचारियों पर नहीं होगा असर?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुमारस्वामी ने प्रस्ताव को भविष्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों से जोड़कर प्रस्तुत किया है।इसका अर्थ है कि विचाराधीन व्यवस्था का उद्देश्य मौजूदा कर्मचारियों के कार्यकाल को तत्काल कम करना नहीं है।हालांकि, सेवा अवधि, पेंशन और नियुक्ति संबंधी नियमों में किसी भी बदलाव के लिए विस्तृत नीतिगत निर्णय और कानूनी प्रक्रिया आवश्यक होगी।फिलहाल सरकार की ओर से सरकारी कर्मचारियों की सेवा अवधि घटाने संबंधी कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
KPSC में भ्रष्टाचार के आरोपों पर जताई चिंता
कर्नाटक लोक सेवा आयोग में कथित भर्ती अनियमितताओं को लेकर भी कुमारस्वामी ने चिंता जताई।उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग में भ्रष्टाचार और पक्षपात के कारण योग्य उम्मीदवारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।कर्नाटक में विभिन्न सरकारी पदों की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर पहले भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। हाल में प्रवर्तन निदेशालय ने कथित भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में जांच की कार्रवाई भी की है।कुमारस्वामी ने कहा कि सरकारी नौकरी पाने के लिए मेहनत करने वाले युवाओं के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।
हर साल भर्ती कैलेंडर जारी करने की मांग
केंद्रीय मंत्री ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी नियमित भर्ती व्यवस्था विकसित करने का सुझाव भी दिया।उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों की भर्ती के लिए वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाना चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रियाओं के बारे में समय पर जानकारी मिल सके।इससे उम्मीदवारों को अपनी तैयारी व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है और भर्ती में होने वाली अनावश्यक देरी को कम किया जा सकता है।
क्या सच में 15 साल की हो जाएगी सरकारी नौकरी?
कुमारस्वामी का प्रस्ताव सरकारी रोजगार व्यवस्था में बदलाव को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इसे लागू करने के बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।सरकारी नौकरियों की अवधि घटाने से पहले कर्मचारी अधिकारों, पेंशन पर होने वाले खर्च, प्रशासनिक अनुभव और भर्ती की लागत जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन करना आवश्यक होगा।फिलहाल केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से इस विचार पर चर्चा करने और अपनी राय देने को कहा है। इसलिए सरकारी नौकरी की अवधि 10 से 15 साल होने की खबर को लागू नियम नहीं, बल्कि एक प्रस्ताव के रूप में ही समझना चाहिए।