बेंगलुरु। केंद्रीय भारी उद्योग और स्टील मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंगलवार को कर्नाटक सरकार पर येत्तिनाहोल पेयजल परियोजना में देरी को लेकर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कोलार और चिक्कबल्लापुर जिलों के लोगों को पिछले 12 वर्षों से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें परियोजना का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया है।मुलबगल में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि वह इस परियोजना को लेकर पहले भी राज्य सरकार की क्षमता पर सवाल उठा चुके हैं और आज भी अपने उसी रुख पर कायम हैं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार कोलार और चिक्कबल्लापुर तक येत्तिनाहोल का पानी पहुंचाने में सफल नहीं होगी।
कुमारस्वामी ने कहा, “मैंने जो पहले कहा था, मैं आज भी उस पर कायम हूं। यह सरकार कोलार और चिक्कबल्लापुर को येत्तिनाहोल का पानी नहीं दे पाएगी।” उन्होंने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोगों से लगातार कहा जा रहा है कि पानी “आज आएगा या कल आएगा”, लेकिन यह इंतजार वर्षों से खत्म नहीं हो रहा है।पूर्व मुख्यमंत्री ने व्यंग्य करते हुए कहा कि इन दोनों जिलों के लोगों के लिए येत्तिनाहोल परियोजना अब “कल आएगा” वाला प्रोजेक्ट बन चुकी है। उनके अनुसार लगातार समयसीमा बताने और नई तारीखें देने के बावजूद पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है, जिससे लोगों में निराशा बढ़ रही है।
कुमारस्वामी ने परियोजना के बुनियादी ढांचे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल पाइपलाइन बिछा देने से किसी परियोजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो जाता। जब तक पर्याप्त मात्रा में पानी लाने, उसे संग्रहित करने और आगे वितरण करने की समुचित व्यवस्था नहीं होगी, तब तक पाइपलाइन का कोई अर्थ नहीं है।उन्होंने कहा, “कोई भी पाइपलाइन बिछा सकता है, लेकिन सवाल यह है कि पानी कहां है? सिर्फ पाइपलाइन बिछाना पैसा खर्च करने के अलावा कुछ नहीं है।” कुमारस्वामी ने राज्य सरकार से कोलार और चिक्कबल्लापुर के लोगों को गुमराह न करने की अपील भी की।
कुमारस्वामी के मुताबिक परियोजना को केवल निर्माण कार्य के आधार पर सफल बताना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी पेयजल योजना की वास्तविक सफलता तभी मानी जा सकती है जब तय क्षेत्र के लोगों तक नियमित रूप से पानी पहुंचने लगे। उनके अनुसार पाइपलाइन, पंपिंग स्टेशन और अन्य संरचनाएं तभी उपयोगी होंगी जब जल स्रोत और भंडारण की व्यवस्था भी पूरी तरह तैयार हो।येत्तिनाहोल परियोजना लंबे समय से कर्नाटक की प्रमुख पेयजल योजनाओं में शामिल रही है। इसका उद्देश्य पानी की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों तक जल पहुंचाना है। विशेष रूप से कोलार और चिक्कबल्लापुर जैसे जिलों में पेयजल की उपलब्धता को लेकर लंबे समय से मांग उठती रही है।
कुमारस्वामी ने कहा कि इन जिलों के लोग वर्षों से परियोजना पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार सरकार की ओर से नई समयसीमा दी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। उन्होंने कहा कि लोगों को आश्वासन देने के बजाय सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि परियोजना कब तक पूरी होगी और पानी की आपूर्ति वास्तव में कब शुरू होगी।पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दौरान वित्तीय खर्च पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि यदि परियोजना का मूल उद्देश्य ही पूरा नहीं हो रहा है, तो केवल पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्यों पर बड़ी रकम खर्च करने का औचित्य जनता के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से चल रही परियोजना में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। यदि किसी चरण में तकनीकी, वित्तीय या प्रशासनिक समस्या है, तो सरकार को उसे खुलकर सामने रखना चाहिए। लगातार नई तारीखें देने से लोगों का भरोसा कमजोर होता है।कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि पेयजल से जुड़ा मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी से आगे का विषय है क्योंकि इसका सीधा संबंध लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से है। उन्होंने सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेने और ऐसे समाधान पर काम करने की मांग की जिससे प्रभावित जिलों तक वास्तव में पानी पहुंच सके।
उनके बयान के बाद येत्तिनाहोल परियोजना को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। विपक्ष पहले भी इस परियोजना की लागत, समयसीमा और प्रगति को लेकर सरकार से सवाल पूछता रहा है। अब कुमारस्वामी के ताजा बयान से परियोजना की मौजूदा स्थिति और जलापूर्ति की वास्तविक समयसीमा को लेकर चर्चा और बढ़ सकती है।कुमारस्वामी ने खास तौर पर कोलार और चिक्कबल्लापुर के लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें केवल उम्मीदों के सहारे नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में लोगों को कई बार भरोसा दिलाया गया, लेकिन अब उन्हें ठोस परिणाम चाहिए।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं का मूल्यांकन घोषणाओं या पाइपलाइन बिछाने की लंबाई से नहीं, बल्कि उससे जनता को मिलने वाले लाभ से होना चाहिए। अगर पानी लोगों तक नहीं पहुंचता, तो बुनियादी ढांचे पर हुआ खर्च अपने उद्देश्य को पूरा नहीं करता।फिलहाल कुमारस्वामी के बयान के बाद राज्य सरकार पर परियोजना की मौजूदा प्रगति, जल उपलब्धता, भंडारण क्षमता और आपूर्ति की समयसीमा स्पष्ट करने का दबाव बढ़ सकता है। येत्तिनाहोल परियोजना को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी जवाब मांगे जाने की संभावना है।