मंगलुरु: पुत्तूर तालुक के एक 62 वर्षीय व्यक्ति ने 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर धोखाधड़ी में कथित तौर पर 1.31 करोड़ रुपये गंवा दिए। अज्ञात लोगों ने मुंबई पुलिस और एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) के अधिकारी बनकर उसे पहलगाम आतंकी हमले के दोषियों को पैसे ट्रांसफर करने के आरोप में गिरफ्तार करने की धमकी दी थी।

धोखाधड़ी करने वालों ने उस व्यक्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेररिस्ट फंडिंग का आरोप लगाया, उसे मौत की सज़ा और उम्रकैद जैसी कड़ी सज़ा की धमकी दी और कई दिनों तक व्हाट्सएप वीडियो कॉल के ज़रिए उसकी निगरानी की। उन्होंने कथित तौर पर उसके फाइनेंस की जांच करने और उसकी बेगुनाही साबित करने के बहाने उससे कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए।

उस व्यक्ति को 27 अगस्त को दोपहर करीब 3 बजे एक अज्ञात नंबर से मोबाइल पर कॉल आया। कॉल करने वाले ने हिंदी और अंग्रेजी में बात करते हुए खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और आरोप लगाया कि पीड़ित ने कश्मीर में पहलगाम नरसंहार के लिए ज़िम्मेदार लोगों को पैसे ट्रांसफर किए थे। कॉल करने वाले ने यह भी दावा किया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

कॉल करने वाले ने उसे बताया कि मुंबई ATS मामले की जांच करेगी और उसे दूसरे नंबर से आने वाले व्हाट्सएप वीडियो कॉल का जवाब देने के लिए कहा। कॉल के दौरान, ATS अधिकारी होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने कथित तौर पर पीड़ित से कहा कि मामला बेहद गोपनीय है और उसे किसी भी परिवार के सदस्य को बातचीत सुनने दिए बिना एक बंद कमरे में बैठने का निर्देश दिया।

धोखाधड़ी करने वालों ने कथित तौर पर व्हाट्सएप के ज़रिए उसे अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए नोटिस भेजे और उसे 48 घंटे के भीतर मुंबई ATS ऑफिस में सरेंडर करने का निर्देश दिया। जब पीड़ित ने कहा कि उसने कोई गलत काम नहीं किया है, तो उन्होंने उसके बैंक खातों और खास फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन की जानकारी देकर उसे यकीन दिलाया कि वे असली सरकारी अधिकारी हैं।

उन्होंने उसे धमकी दी कि अगर उसने परिवार या दोस्तों को इस मामले के बारे में बताया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आरोपियों ने कथित तौर पर व्हाट्सएप वीडियो कॉल के ज़रिए शिकायतकर्ता को धमकाना जारी रखा। उन्होंने उसे रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) सिस्टम के ज़रिए अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। उनकी बातों पर भरोसा करके, पीड़ित ने 2 सितंबर से 6 अक्टूबर, 2026 के बीच कई किस्तों में RTGS के ज़रिए ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.31 करोड़ रुपये (1,31,50,000 रुपये) ट्रांसफर किए।

यह धोखाधड़ी 8 अक्टूबर को तब सामने आई जब बेंगलुरु में रह रही उनकी बेटी ने उन्हें मंगलुरु में हुए इसी तरह के एक मामले के बारे में बताया। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया और पुलिस के पास गए।

पीड़ित के साथ कथित तौर पर 1.31 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई; इस रकम में सोना गिरवी रखकर और अपनी प्रॉपर्टी पर लोन लेकर जुटाया गया पैसा भी शामिल था।

CCPS DK ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66(C) और 66(D) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126(2), 204, 308(6), 318(4), 319(2) और 351 (धारा 3(5) के साथ) के तहत मामला दर्ज किया है।

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