बेंगलुरु। कर्नाटक में पार्क की जमीन के एक हिस्से को दूसरे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने वाले प्रस्तावित बदलाव को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता आर अशोक और बेंगलुरु साउथ के सांसद तेजस्वी सूर्या ने मंगलवार को राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए इस प्रस्ताव को पूरी तरह वापस लेने की मांग की। विवाद उस प्रावधान को लेकर है, जिसमें पार्क की जमीन के 5 प्रतिशत तक हिस्से के डायवर्जन की अनुमति देने की बात कही गई है।
प्रस्ताव के खिलाफ जनता की ओर से विरोध सामने आने के बाद सरकार ने इस बदलाव पर दोबारा विचार करने का फैसला किया है। भाजपा नेताओं ने सरकार के इस कदम का स्वागत तो किया है, लेकिन उनका कहना है कि केवल पुनर्विचार पर्याप्त नहीं है। विवादित प्रावधान को पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए ताकि शहरों में पार्क और सार्वजनिक हरित क्षेत्र सुरक्षित रह सकें।
बेंगलुरु साउथ के सांसद तेजस्वी सूर्या ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने जनता के विरोध के बाद सरकार द्वारा प्रस्ताव पर फिर से विचार किए जाने के फैसले का स्वागत किया और इसे सकारात्मक सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बताया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को पार्क की जमीन के डायवर्जन से जुड़ा प्रावधान पूरी तरह वापस लेना चाहिए।
5 प्रतिशत जमीन के प्रावधान पर विवाद
विवाद की मुख्य वजह प्रस्तावित बदलाव में पार्क की जमीन के 5 प्रतिशत तक हिस्से को अन्य उपयोग के लिए डायवर्ट करने की अनुमति है। इस प्रावधान के सामने आने के बाद बेंगलुरु समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में नागरिकों और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा से जुड़े समूहों की ओर से चिंता जताई गई।
आलोचकों का कहना है कि एक बार पार्क की जमीन को दूसरे उपयोग के लिए इस्तेमाल करने का कानूनी रास्ता खुल गया तो भविष्य में इसका दायरा बढ़ सकता है। इससे शहरों में पहले से सीमित हरित क्षेत्रों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
तेजी से बढ़ते बेंगलुरु जैसे महानगर के लिए पार्क केवल मनोरंजन या घूमने की जगह नहीं हैं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसी वजह से प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।
तेजस्वी सूर्या ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
तेजस्वी सूर्या ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को भेजे अपने पत्र में सरकार से मांग की कि पार्क की जमीन को किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने वाला प्रावधान वापस लिया जाए।
उन्होंने जनता के कड़े विरोध के बाद सरकार द्वारा अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को सकारात्मक कदम बताया। साथ ही कहा कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट फैसला लेते हुए प्रस्तावित बदलाव को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए।
सूर्या का जोर इस बात पर है कि पार्क और सार्वजनिक हरित क्षेत्रों की जमीन को संरक्षित रखा जाए। उनके अनुसार ऐसे स्थान शहर के नागरिकों की साझा संपत्ति हैं और उनके स्वरूप में बदलाव से पहले व्यापक सार्वजनिक हित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
आर अशोक ने भी बढ़ाया दबाव
कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता आर अशोक ने भी सरकार के प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। भाजपा इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रही है।
विपक्ष का तर्क है कि सरकार को जनता के विरोध को देखते हुए केवल प्रस्ताव की समीक्षा नहीं करनी चाहिए बल्कि इसे पूरी तरह वापस लेना चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि पार्क की जमीन के व्यावसायिक या अन्य गैर-पार्क उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की संभावना को खत्म करना जरूरी है।
भाजपा नेताओं की ओर से लगातार उठाए जा रहे सवालों के कारण यह मुद्दा अब कर्नाटक की राजनीति में भी प्रमुखता से सामने आ गया है।
जनता के विरोध के बाद सरकार ने किया पुनर्विचार
प्रस्तावित बदलाव सामने आने के बाद नागरिकों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया। पार्कों की जमीन को अन्य उपयोग के लिए देने की संभावना पर पर्यावरण और शहरी विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय लोगों ने भी चिंता जताई।
इसके बाद सरकार ने प्रस्ताव पर फिर से विचार करने का संकेत दिया। तेजस्वी सूर्या ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
हालांकि विपक्ष इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जब तक विवादित प्रावधान औपचारिक रूप से वापस नहीं लिया जाता तब तक पार्कों की जमीन को लेकर आशंका बनी रहेगी।
बेंगलुरु के हरित क्षेत्रों का सवाल
इस पूरे विवाद के केंद्र में बेंगलुरु के सार्वजनिक पार्क और हरित क्षेत्र हैं। पिछले कुछ दशकों में शहर का तेजी से विस्तार हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ आवासीय और व्यावसायिक निर्माण भी बढ़ा है। इसके कारण खुले स्थानों और हरित क्षेत्रों को संरक्षित रखने की मांग लगातार उठती रही है।
शहर में यातायात, प्रदूषण और बढ़ते निर्माण के बीच पार्क पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये स्थानीय लोगों को खुले स्थान उपलब्ध कराने के साथ शहर के पारिस्थितिक संतुलन में भी योगदान देते हैं।
इसी कारण पार्क की जमीन का एक छोटा हिस्सा भी दूसरे उपयोग के लिए देने का प्रस्ताव संवेदनशील विषय बन गया है। आलोचकों को आशंका है कि 5 प्रतिशत से शुरुआत होने के बाद भविष्य में पार्क की जमीन पर दूसरे निर्माणों का दबाव बढ़ सकता है।
सरकार के अंतिम फैसले पर नजर
सरकार ने प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का संकेत दिया है, लेकिन अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि विवादित प्रावधान को पूरी तरह वापस लिया जाएगा या उसमें संशोधन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को लिखे तेजस्वी सूर्या के पत्र के बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर है। यदि सरकार 5 प्रतिशत जमीन के डायवर्जन वाले प्रावधान को वापस लेती है तो इसे नागरिकों और विपक्ष के विरोध की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा सकता है।
दूसरी ओर यदि सरकार इसमें केवल कुछ बदलाव करती है तो इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रह सकती है। विपक्ष पहले ही साफ कर चुका है कि उसकी मांग पूरे प्रावधान को खत्म करने की है।
शहरी विकास बनाम हरित क्षेत्र की बहस
यह विवाद शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बड़ी बहस से भी जुड़ा है। तेजी से बढ़ते शहरों में सार्वजनिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के लिए जमीन की जरूरत होती है, लेकिन इसके साथ ही पार्क और खुले स्थानों को बचाए रखना भी जरूरी है।
विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि शहरों की योजना बनाते समय हरित क्षेत्रों को केवल खाली जमीन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पार्क नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़े होते हैं।
कर्नाटक में प्रस्तावित बदलाव को लेकर जारी विवाद ने इसी सवाल को फिर सामने ला दिया है। भाजपा नेता आर अशोक और तेजस्वी सूर्या अब सरकार से स्पष्ट और अंतिम निर्णय की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल सरकार ने जनता के विरोध के बाद अपने कदम पर पुनर्विचार का संकेत दिया है। अब निगाह इस बात पर है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार विवादित 5 प्रतिशत वाले प्रावधान को पूरी तरह वापस लेती है या संशोधित स्वरूप में आगे बढ़ाती है।