होसकोटे। कर्नाटक के होसकोटे में पुलिस ने कथित तौर पर सस्ते दाम में करोड़ों रुपये की जमीन दिलाने का लालच देकर लोगों से ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य लोगों को महज 10 लाख रुपये निवेश करने पर करीब एक करोड़ रुपये कीमत की संपत्ति दिलाने का दावा करते थे। इस मामले में कथित मास्टरमाइंड समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शशिकुमार, नागेश, प्रमिला, अंबुजा और वेंकटरवणप्पा के रूप में बताई गई है। सभी आरोपी येलाचेनाहल्ली इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक शशिकुमार गिरोह का मुख्य आरोपी है और उसी ने कथित निवेश योजना के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाने की रणनीति तैयार की थी।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शशिकुमार ने होसकोटे और आसपास के इलाकों में कई लोगों से संपर्क बनाया था। वह पहले लोगों का भरोसा जीतता और फिर उन्हें बाजार कीमत से बेहद कम दाम पर महंगी संपत्ति खरीदने का अवसर मिलने का दावा करता था।

आरोप है कि शशिकुमार संभावित निवेशकों से कहता था कि सिर्फ 10 लाख रुपये लगाने पर वह उन्हें लगभग एक करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली जमीन दिला सकता है। इतना बड़ा मुनाफा मिलने की संभावना देखकर कई लोग उसकी बातों में आ गए।

पुलिस के अनुसार गिरोह खास तौर पर रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों को निशाना बनाता था। आरोपियों को ऐसे लोगों की तलाश रहती थी जो कम समय में संपत्ति में निवेश करके बड़ा मुनाफा कमाने में रुचि रखते हों। संपर्क होने के बाद उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर जमीन दिखाई जाती थी।

आरोप है कि जमीन दिखाते समय शशिकुमार और उसके साथी निवेशकों से कहते थे कि संबंधित संपत्तियां ‘बेनामी प्रॉपर्टी’ हैं। इसी कारण इन्हें वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर खरीदा जा सकता है। लोगों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की जाती थी कि सौदा सामान्य रियल एस्टेट लेनदेन से अलग है और इसी वजह से उन्हें असाधारण लाभ मिल सकता है।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों ने जिन संपत्तियों को निवेशकों को दिखाया था, उनका वास्तविक मालिक कौन है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह का उन जमीनों से कोई कानूनी संबंध था या केवल दूसरे लोगों की संपत्तियां दिखाकर निवेशकों से रकम ली जा रही थी।

जांच में आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि निवेशकों को जमीन से संबंधित कोई दस्तावेज, समझौता या रसीद दी गई थी या नहीं। अगर दस्तावेज उपलब्ध होते हैं तो उनकी प्रामाणिकता की जांच की जाएगी।

मामले में करोड़ों रुपये की ठगी की आशंका जताई गई है। हालांकि गिरोह ने कुल कितने लोगों को निशाना बनाया और वास्तविक रूप से कितनी रकम की धोखाधड़ी हुई, इसकी अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर कथित वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।

गिरोह के बैंक खातों की जांच भी मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पुलिस यह पता लगा सकती है कि पीड़ितों से ली गई रकम किन खातों में जमा हुई और बाद में उसे कहां ट्रांसफर किया गया। बैंकिंग रिकॉर्ड के जरिए रकम के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।

जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि पांच गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस नेटवर्क में और लोग शामिल थे या नहीं। जमीन के कथित सौदों में दस्तावेज तैयार करने, निवेशकों की पहचान करने या रकम इकट्ठा करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर जांच का दायरा बढ़ सकता है।

पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी शशिकुमार ने इलाके में लोगों के बीच पहले अपना भरोसा कायम किया था। इसी भरोसे का इस्तेमाल बाद में कथित निवेश योजना के लिए किया गया। आमतौर पर इस तरह के मामलों में असामान्य रूप से ज्यादा लाभ का वादा निवेशकों को आकर्षित करने का प्रमुख तरीका होता है।

एक करोड़ रुपये की संपत्ति केवल 10 लाख रुपये में मिलने का दावा सामान्य बाजार परिस्थितियों में असाधारण है। ऐसे प्रस्तावों में निवेश करने से पहले जमीन का मालिकाना हक, बाजार मूल्य, सरकारी रिकॉर्ड, रजिस्ट्रेशन की स्थिति और संपत्ति पर किसी तरह के विवाद या ऋण की स्वतंत्र रूप से जांच करना महत्वपूर्ण होता है।

‘बेनामी संपत्ति’ जैसे शब्द का इस्तेमाल भी किसी सौदे को वैध नहीं बनाता। बेनामी लेनदेन से संबंधित मामलों के लिए देश में अलग कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। इसलिए किसी व्यक्ति द्वारा बेहद कम कीमत का कारण ‘बेनामी प्रॉपर्टी’ बताना अपने आप में निवेश की सुरक्षा या वैध मालिकाना हक की गारंटी नहीं है।

पुलिस अब उन लोगों की जानकारी जुटा रही है जो आरोपियों के संपर्क में आए थे। यदि अन्य पीड़ित सामने आते हैं तो उनके बयान और वित्तीय रिकॉर्ड भी जांच में शामिल किए जा सकते हैं। इससे कथित धोखाधड़ी के वास्तविक पैमाने का पता लगाने में मदद मिलेगी।

गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि कथित योजना कब शुरू हुई, कितने लोगों से पैसे लिए गए और रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन तथा अन्य डिजिटल उपकरण भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

फिलहाल पांचों गिरफ्तार व्यक्तियों पर लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। गिरफ्तारी होने मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं होता और आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

होसकोटे पुलिस की कार्रवाई के बाद इस कथित रियल एस्टेट ठगी नेटवर्क से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है। जांच का मुख्य फोकस अब पीड़ितों की संख्या, कथित तौर पर ठगी गई कुल रकम, दिखाई गई संपत्तियों के वास्तविक मालिकों और इस नेटवर्क में शामिल अन्य संभावित लोगों की पहचान पर रहेगा।

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