बेंगलुरु : ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के गठन को एक साल पूरा होने जा रहा है, लेकिन शहर के लोगों की बुनियादी समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं। बेहतर प्रशासन, तेज सेवाएं और नागरिकों की समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से बनाई गई GBA के बावजूद बेंगलुरु के लोग खराब सड़कों, कचरे के ढेर, ट्रैफिक जाम और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं।
2 सितंबर को ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) को बने एक साल पूरा हो जाएगा। हालांकि, इस एक साल के दौरान शहर की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक ढांचा बदलने के बाद भी जमीनी स्तर पर उन्हें कोई खास बदलाव महसूस नहीं हुआ है।
बिना चुने हुए प्रतिनिधियों के प्रशासन पर सवाल
बेंगलुरु के नागरिकों ने लंबे समय से स्थानीय निकाय चुनाव कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शहर का प्रशासन फिलहाल बिना चुने हुए प्रतिनिधियों के चल रहा है, जिससे आम लोगों की आवाज सीधे तौर पर प्रशासन तक नहीं पहुंच पा रही है।
नागरिकों का मानना है कि चुने हुए प्रतिनिधि होने से स्थानीय समस्याओं को बेहतर तरीके से उठाया जा सकता है और उनके समाधान के लिए जवाबदेही भी तय होती है। लोगों ने जल्द से जल्द नगर निकाय चुनाव कराने की मांग तेज कर दी है।
सड़क और फुटपाथ की समस्याएं बरकरार
बेंगलुरु देश के प्रमुख आईटी शहरों में शामिल है, लेकिन यहां की खराब सड़कों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रहती हैं। कई इलाकों में टूटी सड़कें, गड्ढे और अधूरे निर्माण कार्य लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
नागरिकों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में फुटपाथ की कमी के कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती
बेंगलुरु में कचरा प्रबंधन लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है। शहर के कई हिस्सों में नियमित सफाई नहीं होने और कचरे के सही निपटारे की व्यवस्था कमजोर होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
लोगों का कहना है कि GBA बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि कचरा प्रबंधन व्यवस्था में सुधार होगा, लेकिन अभी भी कई इलाकों में कचरे के ढेर दिखाई देते हैं। नागरिकों ने प्रशासन से बेहतर सफाई व्यवस्था और नियमित निगरानी की मांग की है।
आसान सेवाओं के लिए भी परेशानी
नागरिकों की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि छोटी-छोटी सरकारी सेवाओं के लिए उन्हें अब भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि नगर निगम से जुड़े कई दस्तावेज और सेवाएं ऑनलाइन या आसान प्रक्रिया के जरिए उपलब्ध होनी चाहिए थीं, लेकिन अभी भी कई कामों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
लोगों की मांग है कि प्रशासन को डिजिटल सेवाओं को मजबूत करना चाहिए, ताकि जन्म प्रमाण पत्र, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और अन्य जरूरी सेवाएं आसानी से मिल सकें।
GBA से थी बेहतर बदलाव की उम्मीद
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी का गठन शहर के प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने और नागरिकों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था। इसका मकसद बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते महानगर की समस्याओं का बेहतर प्रबंधन करना था।
हालांकि, एक साल बाद भी नागरिकों को लगता है कि बदलाव की रफ्तार धीमी है। लोगों का कहना है कि केवल प्रशासनिक ढांचा बदलने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने और जवाबदेही तय करने की जरूरत है।
चुनाव की मांग तेज
शहर के कई नागरिक समूहों और संगठनों ने मांग की है कि जल्द से जल्द स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाएं। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
लोगों का मानना है कि चुनाव के बाद आने वाले प्रतिनिधि स्थानीय समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और उनके समाधान के लिए प्रशासन पर दबाव बना सकेंगे।
फिलहाल, GBA के एक साल पूरे होने के मौके पर बेंगलुरु के नागरिक प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि शहर की बुनियादी समस्याओं पर तेजी से काम किया जाएगा। सड़क, कचरा, ट्रैफिक और नागरिक सेवाओं से जुड़ी परेशानियों का समाधान करना अब भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।