VB-G RAM G बिल पर विवाद: मंत्री प्रियांक खर्गे ने कहा

Update: 2026-01-14 14:25 GMT
Karnataka कर्नाटक: VB-G RAM G बिल को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। राज्य सरकार के वरिष्ठ नेता और मंत्री प्रियांक खर्गे ने इस बिल को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पंचायती राज संस्थाओं की शक्तियां कमजोर हो गई हैं। उन्होंने कहा कि ये शक्तियां मूल रूप से 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायतों को दी गई थीं, लेकिन नए बिल के साथ उनके अधिकारों में कमी देखने को मिली है।
मंत्री प्रियांक खर्गे ने बंगलुरु में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “बिल की समीक्षा के दौरान स्पष्ट हुआ है कि पंचायतों की शक्तियां कमजोर हुई हैं। हम देखेंगे कि यह प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। हमने इस मुद्दे पर विशेष बहस की मांग की है, लेकिन चूंकि यह वर्ष का पहला सत्र है, इसलिए सत्र की शुरुआत राज्यपाल के विधानसभा को संबोधन के साथ होगी। इसके बाद प्रस्तावित दो दिवसीय विशेष बहस पर विचार किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि VB-G RAM G बिल के प्रभावों को समझना जरूरी है। इसका असर सीधे स्थानीय निकायों और पंचायतों के कामकाज पर पड़ेगा। खर्गे ने यह भी कहा कि बिल के पास होने के बाद निर्णय लेने की प्रक्रिया में केंद्रीकरण बढ़ सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर जनता की भागीदारी और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक में यह बिल सत्ता संरचना और पंचायत प्रणाली के बीच संतुलन को प्रभावित कर सकता है। 73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत पंचायतों को अधिकार, वित्तीय स्वायत्तता और निर्णय लेने की क्षमता दी गई थी। प्रियांक खर्गे के अनुसार, VB-G RAM G बिल के कारण ये अधिकार कम हो सकते हैं, और इससे
ग्रामीण
इलाकों में प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ेगा।
मंत्री ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और विधानसभा में इसे पूरी पारदर्शिता के साथ पेश करना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विपक्ष और अन्य राजनीतिक दल भी इस विषय पर बहस में सक्रिय भागीदारी करेंगे। उनका कहना था कि यह मुद्दा केवल कागजी प्रक्रिया का नहीं, बल्कि सीधे जनता की भागीदारी और पंचायतों के अधिकारों से जुड़ा है।
विशेष बहस के दौरान मंत्रियों और विधायकों के बीच गहन चर्चा होने की संभावना है। खर्गे ने कहा कि दो दिवसीय विशेष चर्चा के माध्यम से इस बिल के सभी पहलुओं और संभावित प्रभावों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायती शक्तियों के कमजोर होने की स्थिति में सरकार को सुधारात्मक कदम उठाने की जिम्मेदारी है।
विश्लेषकों का कहना है कि VB-G RAM G बिल को लेकर कर्नाटक विधानसभा में उठी बहस राज्य की स्थानीय शासन व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर लंबी अवधि में असर डाल सकती है। इस मुद्दे पर नेताओं का रुख, पंचायतों की भूमिका और भविष्य की नीति निर्धारण प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, VB-G RAM G बिल न केवल कागजी प्रक्रिया का विषय है, बल्कि यह कर्नाटक के स्थानीय शासन और लोकतंत्र की मजबूती के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रियांक खर्गे और अन्य नेताओं की सक्रिय भागीदारी से यह बहस आगामी दिनों में विधानसभा के एजेंडे में अहम स्थान बनाएगी।
Tags:    

Similar News