बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती का आकलन इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि सभी नागरिक सरकार के फैसलों से सहमत हैं या नहीं। वास्तविक लोकतंत्र वही है, जहां प्रत्येक नागरिक को सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने की स्वतंत्रता हो। मुख्यमंत्री ने यह बात बेंगलुरु में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में कही। इस दौरान उन्होंने न्यायिक सेवाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए विशेष कोचिंग संस्थान स्थापित करने की योजना का भी उल्लेख किया।
सरकार से सवाल पूछना लोकतंत्र की पहचान
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति नागरिकों के सवाल लोकतंत्र की बुनियादी विशेषता हैं।शिवकुमार ने कहा, "एक मजबूत लोकतंत्र वह नहीं है जहां हर कोई सरकार से सहमत हो। एक मजबूत लोकतंत्र वह है जहां हर नागरिक को सरकार से सवाल करने की आजादी है। आप जिम्मेदार हैं। आप जवाबदेह हैं। आप सभी के पास वे अधिकार हैं जो हमारे संविधान ने आपको दिए हैं। आपके पास सुधार करने की शक्ति है।"उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए संविधान से प्राप्त अधिकारों के साथ नागरिक जिम्मेदारियों को समझने पर जोर दिया।
न्यायिक सेवा के उम्मीदवारों के लिए बनेगा कोचिंग संस्थान
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कर्नाटक सरकार न्यायिक सेवाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए बेंगलुरु के रेसकोर्स परिसर में एक समर्पित कोचिंग संस्थान और परिसर विकसित करने की योजना बना रही है।इस पहल का उद्देश्य न्यायिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।मुख्यमंत्री के मुताबिक, न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए योग्य और प्रशिक्षित युवाओं की भागीदारी आवश्यक है। प्रस्तावित संस्थान के माध्यम से विद्यार्थियों को न्यायिक क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। हालांकि, संस्थान के निर्माण की समयसीमा और अन्य प्रशासनिक विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं।
कानूनी शिक्षा को मजबूत करने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एनएलएसआईयू के शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को आवश्यक भूमि और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार तैयार है।उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने देश में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई थी। राज्य सरकार इस संस्थान को आगे विकसित करने की जिम्मेदारी समझती है।मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आश्वासन दिया कि परिसर के विस्तार के लिए भूमि और संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी
CJI सूर्यकांत समेत कई गणमान्य हस्तियां रहीं मौजूद
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत भी उपस्थित रहे। वे विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैंकार्यक्रम में कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुधीर कृष्णस्वामी और अन्य गणमान्य अतिथि शामिल हुए।इस अवसर पर विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए डिग्रियां और पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का आयोजन 17 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के ज्ञान ज्योति सभागार में किया गया।
नए भवन और छात्र केंद्र की रखी आधारशिला
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य अतिथियों के साथ विश्वविद्यालय परिसर में साउथ ब्लॉक, सभागार और छात्र केंद्र की आधारशिला भी रखी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुविधाओं के विकसित होने से विधि शिक्षा और अनुसंधान के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय भविष्य में ऐसे विधि विशेषज्ञ तैयार करेगा, जो संवैधानिक मूल्यों और कानून के शासन को मजबूत बनाने में योगदान देंगे।
युवाओं को संवैधानिक अधिकारों के प्रति किया जागरूक
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक अधिकारों के महत्व को समझने का संदेश दिया।उन्होंने सार्वजनिक जवाबदेही को लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक बताया। उनके अनुसार, नागरिकों को सरकार से सवाल करने की स्वतंत्रता मिलना और संस्थाओं का जवाबदेह होना एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री की टिप्पणियां लोकतंत्र में असहमति, नागरिक स्वतंत्रता और जिम्मेदार शासन की भूमिका पर केंद्रित रहीं।