बेंगलुरु। शहर की खराब सड़कों और गड्ढों से परेशान वाहन चालकों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिटुमेन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद बेंगलुरु में सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े बड़े पैमाने पर काम प्रभावित हुए हैं। BBMP के ठेकेदारों ने करीब 1,000 करोड़ रुपये के सिविल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम रोक दिया है। इनमें गड्ढों को भरने और सड़कों पर डामर बिछाने से जुड़े काम भी शामिल हैं।
ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा दरों पर सड़क निर्माण और मरम्मत का काम करना उनके लिए आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है। निर्माण सामग्री की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में ठेकेदारों ने सरकार से मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप दरों में संशोधन की मांग की है।
बिटुमेन की कीमत में भारी उछाल
ठेकेदारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के कारण सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की कीमत में लगभग दोगुना इजाफा हुआ है। पहले बिटुमेन करीब 45,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर उपलब्ध था, जो बढ़कर करीब 92,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
बिटुमेन सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली डामर सामग्री का प्रमुख हिस्सा है। इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर सड़क निर्माण और गड्ढों की मरम्मत की लागत पर पड़ता है।
ठेकेदारों का कहना है कि केवल बिटुमेन ही महंगा नहीं हुआ है। सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सीमेंट, बजरी और लोहे की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे पहले से तय दरों पर काम करना उनके लिए घाटे का सौदा बन गया है।
करीब 1,000 करोड़ के प्रोजेक्ट प्रभावित
निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत के चलते बेंगलुरु में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के सिविल और इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य प्रभावित हुए हैं। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में काम जारी रखने पर उन्हें भारी वित्तीय नुकसान होगा।
इन कामों में सड़क निर्माण, सड़क मरम्मत, गड्ढे भरना और डामर बिछाने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। यदि काम लंबे समय तक रुके रहते हैं तो इसका सीधा असर शहर की सड़क व्यवस्था पर पड़ सकता है।
बेंगलुरु में मानसून के दौरान सड़क पर गड्ढों की समस्या अक्सर गंभीर हो जाती है। बारिश के कारण सड़क की सतह टूटने और गड्ढे बढ़ने से वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में सड़क मरम्मत का काम रुकना शहर के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकता है।
ठेकेदारों ने मांगा ‘स्टार रेट’
ग्रेटर बेंगलुरु सिटी कॉरपोरेशन कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार के सामने ‘स्टार रेट’ प्रणाली लागू करने की मांग रखी है। ठेकेदारों का कहना है कि निर्माण सामग्री की कीमतों में अचानक आई बढ़ोतरी को देखते हुए प्रोजेक्ट की लागत को मौजूदा बाजार दरों के अनुसार समायोजित किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन का कहना है कि ‘स्टार रेट’ सिर्फ उन नए प्रोजेक्ट्स पर लागू नहीं होना चाहिए, जिनके लिए अभी टेंडर जारी किए जाने हैं। इसे उन कामों पर भी लागू किया जाना चाहिए, जिनके टेंडर पहले ही जारी हो चुके हैं और जिनके लिए ठेकेदारों ने अनुबंध किया है।
तय दरों पर काम करना मुश्किल
एसोसिएशन के अध्यक्ष जी.एम. नंदकुमार ने TNIE को बताया कि ठेकेदारों की मांग सरकार के सामने रखी गई है। उनके मुताबिक, ‘स्टार रेट’ व्यवस्था को केवल नए कार्यों तक सीमित रखने के बजाय पहले से टेंडर किए जा चुके प्रोजेक्ट्स में भी लागू किया जाना चाहिए।
ठेकेदारों का तर्क है कि जब उन्होंने टेंडर में हिस्सा लिया था, उस समय बिटुमेन और अन्य निर्माण सामग्री की कीमतें मौजूदा स्तर से काफी कम थीं। अब लागत में भारी वृद्धि होने के कारण उसी दर पर काम करना व्यावहारिक नहीं रह गया है।
यदि ठेकेदारों को बढ़ी हुई लागत का कोई समायोजन नहीं मिलता है, तो उनके अनुसार परियोजनाओं को पूरा करने में उन्हें सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय तनाव का स्थानीय असर
बिटुमेन की कीमत में वृद्धि को अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उथल-पुथल से जोड़ा जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर ऊर्जा और कच्चे माल से जुड़े बाजारों पर पड़ने की बात कही जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में बदलाव का असर भारत में निर्माण सामग्री की लागत पर भी पड़ रहा है।
बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में इसका प्रभाव केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहेगा। सड़क निर्माण और मरम्मत परियोजनाओं के रुकने से यातायात व्यवस्था, नागरिक सुविधाओं और शहर के बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।
वाहन चालकों की बढ़ सकती है परेशानी
बेंगलुरु में पहले से ही सड़कों की खराब स्थिति को लेकर लोगों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। शहर में गड्ढों की वजह से वाहन चालकों को परेशानी होती है और बारिश के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है।
यदि गड्ढे भरने और डामर बिछाने के काम में देरी होती है, तो मौजूदा गड्ढों के बढ़ने की आशंका है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से जोखिमपूर्ण हो सकती है। वहीं, प्रमुख सड़कों पर मरम्मत कार्य रुकने से यातायात व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है।
सरकार के फैसले पर नजर
अब ठेकेदारों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। उनका कहना है कि अगर सरकार निर्माण सामग्री की बढ़ी कीमतों को ध्यान में रखते हुए ‘स्टार रेट’ लागू करती है तो रुके हुए कामों को दोबारा शुरू किया जा सकता है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि एक ओर उसे बढ़ती निर्माण लागत को देखते हुए ठेकेदारों की समस्या का समाधान करना होगा, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक धन और परियोजनाओं की लागत को नियंत्रित रखना भी जरूरी होगा।
फिलहाल बिटुमेन और अन्य निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी ने बेंगलुरु के सड़क निर्माण क्षेत्र के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। करीब 1,000 करोड़ रुपये के काम प्रभावित होने और गड्ढे भरने तथा डामर बिछाने के काम रुकने से इसका सीधा असर शहर के नागरिकों पर पड़ सकता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और BBMP ठेकेदारों की ‘स्टार रेट’ की मांग पर क्या फैसला लेते हैं और सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को कब तक फिर से शुरू कराया जा सकता है।