32 टन सरकारी चावल जब्त, फर्जी दस्तावेज मिले

Update: 2026-07-19 05:50 GMT

बेंगलुरु : कर्नाटक सरकार की गरीब परिवारों के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी ‘अन्नभाग्य’ योजना के चावल की कथित कालाबाजारी और विदेशों में तस्करी का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों को मुफ्त में वितरित किए जाने वाले चावल को अवैध तरीके से इकट्ठा कर उसकी प्रोसेसिंग के बाद महाराष्ट्र के रास्ते विदेश भेजे जाने का आरोप है।

पुलिस जांच के अनुसार, कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े लोग सरकारी योजना के तहत मिलने वाले चावल को खरीदकर या अवैध तरीके से हासिल कर उसे पॉलिश कराते थे। इसके बाद इसे सामान्य व्यापारिक चावल के रूप में दिखाकर दुबई और सिंगापुर समेत कुछ विदेशी बाजारों में भेजने की कोशिश की जा रही थी।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस ने गदग शहर के बाहरी इलाके में एक संदिग्ध ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान ट्रक से करीब 32 टन अन्नभाग्य योजना का चावल बरामद किया गया। पुलिस ने चावल की पूरी खेप को जब्त कर लिया और ट्रक चालक से पूछताछ शुरू की।

पूछताछ में चालक ने कथित तौर पर बताया कि चावल को महाराष्ट्र ले जाया जा रहा था। वहां से इसे आगे भेजने की योजना थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अवैध कारोबार के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था।

जांच के दौरान पुलिस को एक और महत्वपूर्ण जानकारी मिली। अधिकारियों के मुताबिक, चावल की खेप के साथ मौजूद दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। जांच में सामने आया कि इन दस्तावेजों में कथित रूप से फर्जी जानकारी दर्ज थी और उन्हें तैयार करने के लिए हावेरी एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग कमिटी (APMC) की नकली मुहर का इस्तेमाल किया गया था।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी योजना के चावल को वैध व्यापारिक माल दिखाने की कोशिश की गई। पुलिस अब इन दस्तावेजों की जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी मुहर और कागजात तैयार करने में कौन लोग शामिल थे।

‘अन्नभाग्य’ योजना कर्नाटक सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक है। इसके तहत पात्र गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चावल दिया जाता है। ऐसे में योजना के चावल की कालाबाजारी का मामला सामने आने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

इससे पहले भी कर्नाटक के कुछ इलाकों से अन्नभाग्य चावल की अवैध बिक्री और बाहर भेजे जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कोप्पल जिले के किसानों ने भी आरोप लगाया था कि सरकारी योजना के तहत गरीबों को मिलने वाला चावल कथित रूप से दुबई और सिंगापुर जैसे देशों तक पहुंचाया जा रहा है।

किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीब परिवारों के लिए निर्धारित खाद्यान्न की चोरी गंभीर मामला है। यदि सरकारी राशन व्यवस्था से जुड़े लोग या बिचौलिए इसमें शामिल हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस और संबंधित विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटे हैं। अधिकारियों का मानना है कि केवल ट्रक चालक तक सीमित कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे मौजूद बड़े गिरोह का पता लगाना जरूरी है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अब तक कितनी मात्रा में सरकारी योजना का चावल अवैध तरीके से बाहर भेजा गया है। इसके अलावा किन-किन जिलों से चावल इकट्ठा किया जाता था और किन रास्तों से इसे दूसरे राज्यों या विदेशों तक पहुंचाया जाता था, इसकी भी जांच की जा रही है।

प्रशासन की ओर से राशन व्यवस्था की निगरानी बढ़ाने और खाद्यान्न की अवैध बिक्री रोकने के लिए कदम उठाए जाने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि गरीबों के लिए निर्धारित खाद्यान्न की हेराफेरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल गदग में पकड़ी गई 32 टन चावल की खेप ने सरकारी योजनाओं के खाद्यान्न वितरण तंत्र पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की आगे की जांच से इस कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े और भी खुलासे होने की उम्मीद है।

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