बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने केंद्र सरकार की “युवा आपदा मित्र” योजना के तहत चुने गए वॉलंटियर्स के लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट खरीदने को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। राज्य के गृह, सूचना, बायोटेक्नोलॉजी और ई-गवर्नेंस मंत्री प्रियांक खड़गे ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इन किटों का इस्तेमाल आपदा और बचाव कार्यों के दौरान किया जाएगा।
योजना के तहत कर्नाटक के 11 जिलों में कुल 10,350 वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। ये वॉलंटियर्स स्काउट्स, राष्ट्रीय सेवा योजना यानी NSS और ‘मेरा युवा भारत’ से जुड़ी एजेंसियों के माध्यम से चुने और प्रशिक्षित किए जाएंगे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद हर वॉलंटियर को एक इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें राहत और बचाव कार्यों के दौरान उपयोग होने वाले जरूरी सुरक्षा उपकरण और अन्य सामग्री शामिल होगी।प्रियांक खड़गे के मुताबिक प्रत्येक किट की कीमत 10,000 रुपये तय की गई है। इस हिसाब से 10,350 वॉलंटियर्स के लिए किट खरीदने पर कुल 10.35 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। कैबिनेट की प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अब संबंधित विभाग इन किटों की खरीद और वितरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
इस योजना में बागलकोट, चिकमगलूर, दक्षिण कन्नड़, बेंगलुरु शहर, कलबुर्गी, कोडगु, रायचूर, शिवमोग्गा, उडुपी, उत्तर कन्नड़ और यादगीर जिलों को शामिल किया गया है। ये क्षेत्र भौगोलिक और मौसम संबंधी अलग-अलग चुनौतियों का सामना करते हैं। कहीं भारी बारिश और बाढ़ का खतरा रहता है तो कहीं भूस्खलन, तेज हवाओं, शहरी आपात स्थितियों और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बनी रहती है।सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवाओं का ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जो किसी आपदा के शुरुआती समय में प्रशासन और राहत एजेंसियों की मदद कर सके। आपदा प्रबंधन में शुरुआती कुछ घंटे बेहद अहम माने जाते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित और जरूरी उपकरणों से लैस वॉलंटियर्स की मौजूदगी राहत और बचाव कार्यों को तेज करने में मदद कर सकती है।
‘युवा आपदा मित्र’ योजना के तहत वॉलंटियर्स को केवल उपकरण ही नहीं दिए जाएंगे, बल्कि उन्हें आपदा प्रतिक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसमें आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने, प्राथमिक राहत, बचाव कार्य में सहायता, प्रभावित क्षेत्र में समन्वय और जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन करने जैसी क्षमताओं पर जोर रहेगा।स्काउट्स और NSS जैसे संगठनों से जुड़े युवाओं को शामिल करने का उद्देश्य पहले से सामाजिक और सार्वजनिक सेवा गतिविधियों में सक्रिय लोगों को आपदा प्रबंधन की विशेष ट्रेनिंग देना है। इसी तरह ‘मेरा युवा भारत’ से जुड़े युवाओं को भी इस कार्यक्रम से जोड़कर राज्य स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन का दायरा बढ़ाया जाएगा।
इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट को वॉलंटियर्स के लिए जरूरी सुरक्षा संसाधन के रूप में देखा जा रहा है। आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य करने वाले लोगों को खुद सुरक्षित रहना भी जरूरी होता है। ऐसे में सुरक्षा उपकरणों से लैस किट वॉलंटियर्स को कठिन परिस्थितियों में काम करने में मदद करेगी। सरकार का कहना है कि इन किटों के जरिए प्रशिक्षित युवाओं को मौके पर अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जाएगा।कर्नाटक के कई जिलों में हर साल मानसून के दौरान बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी स्थितियां सामने आती हैं। तटीय और पहाड़ी जिलों में भारी बारिश के कारण आपदा प्रबंधन की चुनौती और बढ़ जाती है। वहीं बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में शहरी बाढ़, जलभराव, आग और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया की जरूरत रहती है।
सरकार की इस पहल का मकसद राज्य की मौजूदा आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सामुदायिक भागीदारी के जरिए और मजबूत करना है। प्रशासनिक एजेंसियों, पुलिस, अग्निशमन और अन्य राहत बलों के साथ प्रशिक्षित वॉलंटियर्स का सहयोग प्रभावित क्षेत्रों में शुरुआती प्रतिक्रिया को बेहतर बना सकता है।योजना के तहत जिन 10,350 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा, उनसे अपने-अपने क्षेत्र में आपदा के दौरान सहायता देने के अलावा लोगों को जागरूक करने में भी भूमिका निभाने की उम्मीद है। आपदा से पहले तैयारी, जोखिम वाले इलाकों की पहचान और स्थानीय लोगों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देना भी प्रभावी आपदा प्रबंधन का हिस्सा माना जाता है।
प्रियांक खड़गे ने कहा कि कैबिनेट की मंजूरी से इन वॉलंटियर्स के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार चाहती है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें वास्तविक आपात स्थिति में काम आने वाले संसाधन भी उपलब्ध हों।10.35 करोड़ रुपये की इस परियोजना के जरिए राज्य सरकार 11 जिलों में आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। हर प्रशिक्षित वॉलंटियर को व्यक्तिगत इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट दिए जाने से बड़े स्तर पर स्थानीय सहायता नेटवर्क तैयार होने की उम्मीद है।कुल मिलाकर, कर्नाटक सरकार का यह फैसला प्राकृतिक आपदाओं और आपात परिस्थितियों से निपटने में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब प्रशिक्षण और किट वितरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन 10,350 वॉलंटियर्स को राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था में एक अतिरिक्त सहयोगी ताकत के रूप में तैयार किया जाएगा।
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