बेंगलुरु: मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य एक नया मॉडल ला रहा है, जिसके तहत कंपनियां अपने CSR फंड के जरिए गांवों के प्राथमिक स्कूलों को गोद लेंगी। इसका मकसद ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकना है।

बुधवार शाम को IT कंपनियों और स्कूल प्रबंधन के साथ होने वाली बैठक से पहले उन्होंने कहा, "हम CSR फंड के जरिए गांवों के प्राथमिक स्कूलों को गोद लेने का एक नया मॉडल लेकर आ रहे हैं।" उन्होंने बताया कि कुछ कंपनियों ने तो इसकी शुरुआत भी कर दी है। "मेरे अपने जिले में ही 30 स्कूलों को गोद लिया गया है। कंपनियां इन पर लगभग 10 से 12 करोड़ रुपये खर्च कर रही हैं। वे सरकारी स्कूलों का निर्माण कर रही हैं और उन्हें सरकार को सौंप रही हैं।"

उन्होंने बेंगलुरु जिले में इस पहल से जुड़ी संस्थाओं में 'प्रेस्टीज' और 'एम्बेसी' का नाम लिया और कहा कि सरकार इस मॉडल को और आगे ले जाना चाहती है। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि पंचायत स्तर के स्कूल और मजबूत बनें। 

मुख्यमंत्री ने इस योजना को शहरीकरण से जोड़ते हुए कहा, "लोग सिर्फ शिक्षा और रोजगार के लिए शहरों की ओर जा रहे हैं।" उन्होंने बताया कि शहरी आबादी का हिस्सा लगभग 29-30% से बढ़कर 43-44% हो गया है। एक दिन पहले मिली समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, 2047 तक यह आंकड़ा 70% को पार कर सकता है। "यही वजह है कि हम उन्हें गांवों में ही अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना चाहते हैं। 

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