बोकारो। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के बोकारो स्टील प्लांट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया रिकॉर्ड कायम किया है। उत्पादन क्षमता, लागत नियंत्रण, ऊर्जा दक्षता और मूल्यवर्धित उत्पादों पर बेहतर फोकस के चलते बोकारो स्टील प्लांट सेल के सभी एकीकृत संयंत्रों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला प्लांट बनकर उभरा है। प्लांट ने पहली तिमाही में कर पूर्व लाभ (PBT) को 97.82 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 715.57 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है।
बोकारो स्टील प्लांट की इस उपलब्धि को संयंत्र की परिचालन क्षमता और रणनीतिक सुधारों का परिणाम माना जा रहा है। कंपनी के अनुसार, उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ लागत नियंत्रण और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से मुनाफे में बड़ा सुधार देखने को मिला है। पहली तिमाही में प्लांट का परिचालन राजस्व 9.37 प्रतिशत बढ़कर 5,376 करोड़ रुपये से 5,880 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, ईबीआईटीडीए यानी ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई लगभग दोगुनी होकर 588 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,154 करोड़ रुपये पहुंच गई।
बोकारो स्टील प्लांट का ईबीआईटीडीए मार्जिन भी 10.94 प्रतिशत से बढ़कर 19.62 प्रतिशत हो गया, जो सेल के सभी एकीकृत संयंत्रों में सबसे अधिक दर्ज किया गया। यह आंकड़ा बताता है कि प्लांट ने केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं बल्कि प्रत्येक टन इस्पात से होने वाली आय और लाभप्रदता में सुधार पर भी ध्यान दिया है।
पहली तिमाही के दौरान उत्पादन के क्षेत्र में भी बोकारो स्टील ने कई नए कीर्तिमान बनाए। ओवन पुशिंग, ग्रास सिंटर, हॉट मेटल, क्रूड स्टील और बिक्री योग्य कोल्ड रोल्ड उत्पादन में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया गया। 17 मई को प्लांट ने 22,516 टन ग्रास सिंटर उत्पादन का नया दैनिक रिकॉर्ड बनाया। वहीं 22 अप्रैल को 18,206 टन हॉट मेटल उत्पादन दर्ज किया गया, जो एक बड़ी उपलब्धि रही।
जून महीने में प्रतिदिन औसतन 531 ओवन पुशिंग का रिकॉर्ड भी बनाया गया। इसके अलावा कोल डस्ट इंजेक्शन की दर बढ़ाने से कोक की खपत में कमी आई और ब्लास्ट फर्नेस की कार्यक्षमता में सुधार हुआ। इससे उत्पादन लागत कम करने में मदद मिली और संयंत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।
ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में भी बोकारो स्टील प्लांट ने उल्लेखनीय प्रगति की है। पहली तिमाही में विशिष्ट ऊर्जा खपत घटकर 6.314 गीगाकैलोरी प्रति टन क्रूड स्टील रही। जून महीने में यह आंकड़ा और बेहतर होकर 6.274 गीगाकैलोरी प्रति टन के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। जल संरक्षण और कच्चे माल के बेहतर प्रबंधन से भी लागत घटाने में सफलता मिली।
मूल्यवर्धित इस्पात उत्पादों की बिक्री ने भी प्लांट की सफलता में अहम भूमिका निभाई। जून में कोल केमिकल्स की रिकॉर्ड 38.92 करोड़ रुपये की बिक्री हुई। इसके साथ ही सेकेंडरी स्टील का भंडार न्यूनतम स्तर पर रहा, जिससे बाजार की मांग और उत्पादन के बीच बेहतर संतुलन बना रहा।
बोकारो स्टील प्लांट ने सुरक्षा मानकों को मजबूत करने के साथ ठेका श्रमिकों के योगदान को भी महत्वपूर्ण माना है। संयंत्र अब वर्ष 2030 तक अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर लगभग 7.50 मिलियन टन करने की दिशा में काम कर रहा है।
विशेष और मूल्यवर्धित इस्पात उत्पादों के विकास पर जोर देकर बोकारो स्टील प्लांट आत्मनिर्भर भारत अभियान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। पहली तिमाही का रिकॉर्ड प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि बोकारो स्टील आने वाले समय में सेल के विकास में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।