झारखंड: हाई कोर्ट ने झामुमो नेता निर्मल महतो हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी नरेंद्र सिंह दीक्षित की समय-पूर्व रिहाई के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सजा समीक्षा बोर्ड (State Sentence Review Board) के उस निर्णय को रद्द कर दिया है, जिसमें नरेंद्र सिंह दीक्षित की रिहाई को मंजूरी दी गई थी। हाई कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह मामले पर दोबारा विचार करे और राज्य सरकार की वर्ष 2011 की समय-पूर्व रिहाई नीति के अनुसार तीन महीने के भीतर नया निर्णय ले।
यह फैसला झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आर. मुखोपाध्याय की अदालत ने सुनाया। अदालत ने नरेंद्र सिंह दीक्षित की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। हाई कोर्ट ने कहा कि सजा समीक्षा बोर्ड द्वारा मामले पर विचार करते समय कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया था, इसलिए पुराने निर्णय को बरकरार नहीं रखा जा सकता।
जानकारी के अनुसार, नरेंद्र सिंह दीक्षित झारखंड के चर्चित झामुमो नेता निर्मल महतो हत्याकांड में दोषी ठहराए गए थे और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह करीब 29 वर्ष की सजा पूरी कर चुके हैं। इसके बाद उनकी समय-पूर्व रिहाई को लेकर राज्य सजा समीक्षा बोर्ड के सामने मामला रखा गया था।
बोर्ड ने उनकी रिहाई को लेकर निर्णय लिया था, लेकिन इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह मुद्दा उठाया गया कि क्या बोर्ड ने रिहाई के लिए तय नियमों और आवश्यक मानकों का सही तरीके से पालन किया था या नहीं।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार की 26 मई 2011 को जारी समय-पूर्व रिहाई नीति के प्रावधानों के तहत मामले की समीक्षा की जानी चाहिए। अदालत ने बोर्ड को निर्देश दिया कि वह सभी जरूरी तथ्यों, दस्तावेजों और रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से निर्णय ले।
अदालत की टिप्पणी के अनुसार, बोर्ड द्वारा निर्णय लेते समय प्रोबेशन रिपोर्ट और नीति में निर्धारित कुछ मानकों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में पुराने निर्णय को रद्द करना उचित माना गया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिहाई का अंतिम फैसला नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, समय-पूर्व रिहाई के मामलों में सरकार और सजा समीक्षा बोर्ड को कई पहलुओं पर विचार करना होता है। इसमें कैदी का जेल में व्यवहार, अपराध की गंभीरता, समाज पर प्रभाव, पुनर्वास की संभावना और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट शामिल होती है।
निर्मल महतो हत्याकांड झारखंड के राजनीतिक इतिहास का एक चर्चित मामला रहा है। झामुमो नेता निर्मल महतो की हत्या के बाद राज्य की राजनीति में काफी हलचल हुई थी। इस मामले में दोषियों को अदालत ने सजा सुनाई थी और लंबे समय से यह मामला चर्चा में रहा है।
अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सजा समीक्षा बोर्ड को तीन महीने के भीतर नरेंद्र सिंह दीक्षित की रिहाई के मामले पर फिर से विचार करना होगा। बोर्ड को 2011 की नीति के तहत सभी जरूरी पहलुओं की समीक्षा कर नया फैसला लेना होगा।
फिलहाल हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद नरेंद्र सिंह दीक्षित की समय-पूर्व रिहाई पर फैसला टल गया है। अब सभी की नजरें राज्य सजा समीक्षा बोर्ड की अगली बैठक और उसमें लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी हैं।