जामताड़ा में मिला दुर्लभ भौंकने वाला हिरण, वन विभाग ने किया रेस्क्यू

Update: 2026-07-21 12:07 GMT

जामताड़ा। झारखंड के जामताड़ा जिले में मंगलवार को एक दुर्लभ प्रजाति के हिरण के मिलने से ग्रामीणों में उत्सुकता फैल गई। नारायणपुर प्रखंड के चंपापुर गांव में ग्रामीणों ने एक ऐसे हिरण को देखा, जिसकी आवाज कुत्ते के भौंकने जैसी होती है। इसी खासियत के कारण इसे ‘भौंकने वाला हिरण’ या ‘काकड़’ कहा जाता है। ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए हिरण को नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद टीम ने मौके पर पहुंचकर उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे चंपापुर गांव में अचानक एक हिरण दिखाई दिया। हिरण को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। भीड़ बढ़ने के बावजूद लोगों ने वन्यजीव के प्रति संवेदनशीलता दिखाई और उसे पकड़ने या परेशान करने की कोशिश नहीं की। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी।

सूचना मिलते ही नारायणपुर के वनरक्षी सपन कुमार पंडित अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे। वन विभाग की टीम ने काफी सावधानी बरतते हुए हिरण को सुरक्षित तरीके से पकड़ा और उसे नारायणपुर स्थित वन विभाग कार्यालय ले आई। अधिकारियों ने बताया कि हिरण पूरी तरह स्वस्थ है और उसे जल्द ही उसके प्राकृतिक वातावरण यानी जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह हिरण संभवत: आसपास के जंगलों से भटककर गांव तक पहुंचा होगा। आशंका जताई जा रही है कि यह टुंडी जंगल क्षेत्र की ओर से आया हो सकता है। हालांकि, इस बात की भी संभावना है कि नारायणपुर क्षेत्र के स्थानीय जंगलों में भी इस प्रजाति की मौजूदगी हो।

भौंकने वाला हिरण यानी काकड़ वैज्ञानिक रूप से मुंटजैक (Muntjac) प्रजाति का हिरण होता है। यह भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के घने जंगलों में पाया जाता है। इसकी सबसे खास पहचान इसकी आवाज है। जब इसे आसपास किसी शिकारी जानवर जैसे बाघ, तेंदुआ या अन्य खतरे का आभास होता है तो यह कुत्ते की तरह तेज और तीखी आवाज निकालता है। इसकी यह आवाज काफी दूर तक सुनाई देती है और जंगल के अन्य जीवों को भी खतरे के प्रति सतर्क कर देती है।

काकड़ आकार में अन्य हिरणों की तुलना में छोटा होता है। नर हिरण के सिर पर छोटे सींग होते हैं। इसके अलावा इसके मुंह में छोटे लेकिन नुकीले दांत भी होते हैं, जिनका इस्तेमाल वह अपनी सुरक्षा के लिए करता है। यह मुख्य रूप से शाकाहारी जीव है और घास, पत्तियां, फल तथा वनस्पतियां खाता है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर यह छोटे कीड़े या पक्षियों के अंडे भी खा सकता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, काकड़ जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह जंगल में जैव विविधता को बनाए रखने में भूमिका निभाता है। ऐसे दुर्लभ जीवों का मानव बस्तियों में पहुंचना कई बार जंगलों में बदलाव, भोजन की तलाश या रास्ता भटकने का संकेत हो सकता है।

जामताड़ा में मिले इस दुर्लभ हिरण को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा गया। लोगों ने वन विभाग की कार्रवाई की सराहना की और उम्मीद जताई कि हिरण को जल्द सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाएगा, जहां वह अपने प्राकृतिक वातावरण में रह सकेगा। वन विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि भविष्य में यदि कोई वन्यजीव दिखाई दे तो उसे पकड़ने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत विभाग को सूचना दें।

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