झारखंड परीक्षा विवाद में नया खुलासा ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को मिला था काम
रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था और उनकी पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं के रद्द होने के बाद अब जांच में सामने आया है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने केवल ब्लैकलिस्टेड कंपनी टीडीपीएल को ही परीक्षा संचालन का काम नहीं सौंपा था, बल्कि ऐसी अन्य कंपनियों को भी जिम्मेदारी दी गई थी जिनके खिलाफ दूसरे राज्यों में कार्रवाई हो चुकी है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जेपीएससी ने परीक्षा संचालन के लिए बिनसिस टेक्नोलॉजिज और आईसीएन इंडिया जैसी कंपनियों को भी काम दिया था। बताया जा रहा है कि दोनों कंपनियां दिल्ली से गिरफ्तार किए गए अरुण कुमार से जुड़ी हुई हैं। अरुण कुमार इन कंपनियों में निदेशक पद पर हैं। फिलहाल अरुण कुमार से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है।
इस खुलासे के बाद परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन कंपनियों को परीक्षा संचालन का जिम्मा किस आधार पर दिया गया और क्या चयन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया गया था। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता या मिलीभगत तो नहीं हुई।
गौरतलब है कि झारखंड में पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों में नाराजगी बनी हुई है। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आंदोलन भी किया था। छात्रों की मांग थी कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और दोषी लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
अब सामने आए नए तथ्यों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। आरोप है कि जिन कंपनियों को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दी गई, उनके रिकॉर्ड की पर्याप्त जांच नहीं की गई। खासतौर पर ऐसी कंपनियों को जिम्मेदारी देने पर सवाल उठ रहे हैं, जिनके खिलाफ पहले से ही दूसरे राज्यों में कार्रवाई हो चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, बिनसिस टेक्नोलॉजिज और आईसीएन इंडिया को लेकर भी जांच की जा रही है। बिहार में इन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां अब इन कंपनियों की पिछली गतिविधियों, उनके काम करने के तरीके और परीक्षा संचालन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं।
अरुण कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि परीक्षा संचालन से जुड़े मामलों में एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या अलग-अलग राज्यों में परीक्षा संचालन के नाम पर एक ही तरह की अनियमितताएं हुई हैं।
वहीं, छात्रों और विपक्षी दलों ने इस मामले में सरकार और परीक्षा आयोगों से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों का चयन पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए और कंपनियों की पृष्ठभूमि की जांच अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।
परीक्षा विवाद के बीच सरकार की ओर से भी जांच और सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में किसी कंपनी या व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जांच एजेंसियां अरुण कुमार और उनसे जुड़ी कंपनियों के दस्तावेजों, अनुबंधों और परीक्षा संचालन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना सरकार और परीक्षा आयोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। छात्रों की नजर अब जांच रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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