Jamshedpur जमशेदपुर : करीब 100 करोड़ रुपये के कथित जीएसटी घोटाले के मामले में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जमशेदपुर के स्क्रैप कारोबारी अजय शर्मा को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अजय शर्मा फर्जी कंपनियों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अवैध लाभ लेने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
डीजीजीआई की टीम ने संयुक्त निदेशक अभिनव कुमार के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए जमशेदपुर के बारीडीह स्थित अजय शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान जांच टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए, जिनकी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, पूछताछ के बाद अजय शर्मा को बुधवार देर शाम गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। डीजीजीआई अब मामले की आगे की जांच कर रही है और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर ‘गणेश ट्रेडिंग’ और ‘कांतिक ट्रेडिंग’ समेत कई फर्मों के नाम पर कागजी लेन-देन दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत तरीके से लाभ उठा रहा था। एजेंसी का दावा है कि इन फर्जी कंपनियों के जरिए बड़े स्तर पर बिलिंग का नेटवर्क चलाया जा रहा था।
डीजीजीआई अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में करीब 100 करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग नेटवर्क के संकेत मिले हैं। हालांकि, अभी यह पता लगाया जा रहा है कि इस कथित फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को वास्तविक रूप से कितने राजस्व का नुकसान हुआ है। इसके लिए वित्तीय रिकॉर्ड, लेन-देन और कंपनियों के दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने कारोबारी और कंपनियां शामिल हैं। अधिकारियों को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में कई अन्य नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल जब्त किए गए डिजिटल डेटा और वित्तीय दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
जांच के दौरान अजय शर्मा के संबंध कुछ ऐसे कारोबारियों से होने के संकेत भी मिले हैं, जो पहले से कथित जीएसटी फर्जीवाड़े के मामलों में जांच के दायरे में हैं और कुछ आरोपी जेल में बंद बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में डीजीजीआई की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।
गौरतलब है कि जीएसटी लागू होने के बाद से ही फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग को रोकने के लिए जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। डीजीजीआई समय-समय पर ऐसे मामलों में छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई करती रही है।
झारखंड समेत कई राज्यों में सक्रिय कथित फर्जी बिलिंग नेटवर्क की जांच पिछले कई महीनों से जारी है। डीजीजीआई अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में वित्तीय लेन-देन, फर्जी कंपनियों और कथित लाभार्थियों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है।
फिलहाल अजय शर्मा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में शामिल अन्य लोगों और कंपनियों की पहचान की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और कथित घोटाले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।