धनबाद : जामाडीह मौजा में 141.50 एकड़ जमीन को संरक्षित वन भूमि बताकर खनन गतिविधियों पर रोक लगाने के मामले में झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम Court ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट के नवंबर 2024 के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार की याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और इसमें मेरिट नहीं पाई गई।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने की। पीठ ने झारखंड सरकार की दलीलों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा गया, जिसमें भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के पक्ष में फैसला सुनाया गया था।

दरअसल, यह पूरा मामला धनबाद जिले के जामाडीह मौजा स्थित 141.50 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है। झारखंड सरकार ने इस जमीन को संरक्षित वन भूमि बताते हुए यहां माइनिंग गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। सरकार की ओर से जारी आदेशों के बाद बीसीसीएल के खनन कार्य पर असर पड़ा था। इसके बाद बीसीसीएल ने इन आदेशों को चुनौती देते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

झारखंड हाईकोर्ट ने नवंबर 2024 में इस मामले की सुनवाई करते हुए बीसीसीएल के पक्ष में फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से माइनिंग रोकने के लिए जारी किए गए दोनों आदेशों को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि बीसीसीएल को अपने अधिकारों के तहत खनन कार्य करने से रोका नहीं जा सकता।

हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। राज्य सरकार का तर्क था कि संबंधित जमीन संरक्षित वन क्षेत्र की श्रेणी में आती है और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से वहां खनन गतिविधियों को नियंत्रित करना जरूरी है। सरकार ने अपने आदेशों को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

वहीं, बीसीसीएल की ओर से दलील दी गई कि जमीन पर खनन गतिविधियां नियमों के अनुसार संचालित की जा रही हैं और राज्य सरकार द्वारा अचानक रोक लगाने से कंपनी के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। कंपनी ने हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य सरकार के आदेशों से उसके अधिकार प्रभावित हो रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने राज्य सरकार की याचिका में कोई पर्याप्त आधार नहीं पाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की याचिका को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बीसीसीएल को राहत मिली है। अब कंपनी के लिए जामाडीह क्षेत्र में खनन गतिविधियों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, राज्य सरकार के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उसने पर्यावरण और वन भूमि संरक्षण के आधार पर माइनिंग रोकने का कदम उठाया था।

इस मामले ने एक बार फिर विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस को सामने ला दिया है। खनन क्षेत्र में जहां रोजगार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियां जरूरी हैं, वहीं वन क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

धनबाद को देश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में शामिल किया जाता है और यहां बड़ी संख्या में खनन परियोजनाएं संचालित होती हैं। बीसीसीएल इस क्षेत्र में लंबे समय से कोयला उत्पादन का काम कर रही है। ऐसे में जामाडीह जमीन विवाद का सीधा असर कंपनी की गतिविधियों पर पड़ रहा था।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है। अब बीसीसीएल को राहत मिली है, जबकि राज्य सरकार के पास आगे की रणनीति तय करने का विकल्प रहेगा। इस पूरे मामले पर प्रशासन और खनन विभाग की गतिविधियों पर भी नजर रहेगी।

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