Jharkhand झारखंड : पलामू समेत पूरे राज्य के सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण (मध्याह्न भोजन) योजना के तहत कार्यरत रसोइया सह सहायिकाओं के लिए अब निर्धारित ड्रेस कोड लागू किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य मध्याह्न भोजन तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान स्वच्छता और साफ-सफाई के मानकों को और बेहतर बनाना है।
झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने इस दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए सभी कार्यरत एवं अनुमोदित रसोइया सहायिकाओं को दो सेट यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इनमें साड़ी या धोती-कुर्ता शामिल होंगे, जिन्हें पहनकर वे निर्धारित ड्रेस कोड में कार्य करेंगी।
इस योजना के तहत प्रत्येक रसोइया सह सहायिका के बैंक खाते में 500 रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जाएगी। यह राशि ड्रेस कोड के लिए निर्धारित कपड़ों की खरीद में उपयोग की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम स्वच्छता, पहचान और कार्यस्थल पर अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।
प्राधिकरण द्वारा सभी संबंधित जिलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि 30 जून तक लाभार्थियों की जानकारी और भुगतान प्रक्रिया को पीएफएमएस (Public Financial Management System) पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाए, ताकि समय पर राशि का वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
पलामू जिले की बात करें तो यहां कुल 5,434 रसोइया सह सहायिकाएं इस योजना के अंतर्गत कार्यरत हैं, जिन्हें इस ड्रेस कोड योजना का लाभ मिलेगा। जिला प्रशासन ने राज्य मुख्यालय के निर्देश के बाद तैयारियां शुरू कर दी हैं और सभी लाभार्थियों का डेटा संकलित किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, मध्याह्न भोजन योजना स्कूलों में बच्चों के पोषण और उपस्थिति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों की स्वच्छता और पहचान सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी माना जा रहा है।
इस पहल से न केवल कार्यस्थल पर साफ-सफाई को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रसोइया सहायिकाओं की एक समान पहचान भी सुनिश्चित होगी। इससे स्कूलों में व्यवस्था और अनुशासन को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लाभार्थियों की सूची समय पर अपडेट करें और किसी भी तरह की देरी न हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचे।
इस निर्णय का स्वागत कई स्तरों पर किया जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल स्वच्छता में सुधार होगा बल्कि रसोइया सहायिकाओं को भी एक सम्मानजनक पहचान मिलेगी।
फिलहाल प्रशासन इस योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करने में जुटा है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सभी रसोइया सहायिकाएं निर्धारित ड्रेस कोड में कार्य करते हुए नजर आएंगी।