उधार के राशन के भरोसे कब तक चलेगा मिड-डे मील?

Update: 2026-06-27 11:54 GMT

बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों के निवाले पर संकट मंडराने लगा है। जिले के सरकारी विद्यालयों में संचालित महत्वाकांक्षी मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना इस समय गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है। पिछले तीन महीनों से एमडीएम मद की राशि का भुगतान नहीं होने के कारण विद्यालय प्रबंधन समिति और रसोइयों के सामने बच्चों को भोजन कराने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। हालत यह है कि कई स्कूलों में स्थानीय दुकानदारों से उधार लेकर जैसे-तैसे भोजन बनाया जा रहा है, तो कई जगहों पर मजबूरन मेन्यू में कटौती करनी पड़ रही है। इस लचर व्यवस्था से विद्यालय प्रबंधन और अभिभावक बेहद परेशान हैं।

दुकानदारों ने हाथ खड़े किए, मेन्यू में कटौती करने को मजबूर शिक्षक

विभिन्न सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों (हेडमास्टरों) का कहना है कि एमडीएम योजना के तहत समय पर राशि नहीं मिलने से दैनिक खर्च चलाना असंभव हो गया है। सरकार की ओर से केवल चावल उपलब्ध कराया जाता है, जबकि दाल, हरी सब्जियां, मसाले, तेल और रसोई गैस (एलपीजी) जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री खुले बाजार से नकद खरीदनी पड़ती है। तीन महीने से फंड न मिलने के कारण स्थानीय दुकानदारों का बकाया काफी बढ़ गया है, जिससे अब उन्होंने और अधिक उधार राशन देने से साफ इनकार कर दिया है। ऐसी स्थिति में बच्चों को सरकार द्वारा निर्धारित चार्ट के अनुसार पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

गरीब बच्चों के पोषण और उपस्थिति पर पड़ेगा सीधा असर

इस अव्यवस्था को लेकर छात्रों के अभिभावकों में भारी चिंता देखी जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर और मजदूर परिवारों से आते हैं। इन बच्चों के लिए स्कूल में मिलने वाला मध्याह्न भोजन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि दिनभर के पोषण का एक बड़ा और महत्वपूर्ण स्रोत है। यदि सरकार ने जल्द ही राशि जारी नहीं की, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर बच्चों के स्वास्थ्य, उनके पोषण स्तर और स्कूल में उनकी दैनिक उपस्थिति (अटेंडेंस) पर पड़ेगा। कई बच्चे केवल भोजन के आकर्षण में भी नियमित स्कूल आते हैं।

शिक्षक संघ ने उठाई आवाज, जल्द भुगतान की मांग

सरकारी स्कूलों की इस बदहाली पर झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ, बोकारो ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ के प्रधान सचिव गौतम कुमार सिंह ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि पिछले तीन महीनों से लंबित एमडीएम की राशि का अविलंब भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों पर बिना बजट के भोजन बनवाने का मानसिक दबाव बनाना गलत है। योजना को सुचारु रूप से संचालित करने और बच्चों को तय मानकों के अनुरूप भोजन देने के लिए फंड का तुरंत मिलना बेहद जरूरी है।

अधिकारियों का दावा: आवंटन मिलते ही खातों में भेजी जाएगी राशि

इस गंभीर मामले पर प्रखंड शिक्षा प्रसार अधिकारियों (BEEO) ने अपनी सफाई पेश की है। चास की बीईईओ प्रतिमा दास ने बताया कि ब्लॉक के सभी विद्यालयों से एमडीएम के संचालन और बकाया राशि की रिपोर्ट मांगी जा रही है। उच्च अधिकारियों को जिले की वास्तविक स्थिति से अवगत करा दिया गया है। जैसे ही विभाग से राशि प्राप्त होगी, उसे तुरंत स्कूलों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। वहीं, चंदनकियारी के बीईईओ कानन पात्रा ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों का मध्याह्न भोजन बाधित नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे भोजन की गुणवत्ता और नियमितता बनाए रखें, और राशि आते ही सभी लंबित भुगतानों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर कर दिया जाएगा।

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