हिंदू परिवार निकालता है मोहर्रम जुलूस

Update: 2026-06-26 11:34 GMT

झारखंड: चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड स्थित हेडूम गांव में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। यहां एक हिंदू परिवार पिछले 72 वर्षों से मोहर्रम का पर्व पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ मना रहा है। परिवार के सदस्य हर साल ताजिया जुलूस निकालते हैं और इस आयोजन में पूरे गांव के लोग मिलकर हिस्सा लेते हैं।

परिवार स्वयं अपने हाथों से ताजिया तैयार करता है और फिर गाजे-बाजे के साथ गांव में जुलूस निकाला जाता है। यह जुलूस कल्याणपुर मोड़ स्थित रामदेव सिंह भोक्ता मैदान तक पहुंचता है, जहां मेले का आयोजन होता है। इस मेले में आसपास के कई गांवों से लोग शामिल होते हैं और पारंपरिक युद्धक कलाओं का प्रदर्शन भी किया जाता है।

इस परंपरा में गांव के हिंदू युवक “पैकाह” बनकर कमर में घंटियां बांधते हैं और मोर पंख लेकर आसपास के क्षेत्रों में घूमते हैं। वे अमन, शांति और भाईचारे का संदेश देते हैं। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस आयोजन में उत्साह से भाग लेते हैं।

परिवार के सदस्य कामाख्या सिंह भोक्ता बताते हैं कि यह परंपरा तीन पीढ़ियों से चली आ रही है। उनके अनुसार इसकी शुरुआत उनके दादा बंधु गंझू ने की थी। मान्यता है कि एक फकीर की सलाह के बाद परिवार में खुशहाली आई और तभी से मोहर्रम मनाने की परंपरा शुरू हुई।

खास बात यह है कि इस गांव में कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहता, फिर भी यहां दशकों से मोहर्रम मनाया जा रहा है। गांव में करीब एक हजार की आबादी है और सभी समुदाय के लोग इस आयोजन में सहयोग करते हैं।

परिवार के घर परिसर में मंदिर और मस्जिद दोनों बने हुए हैं, जहां क्रमशः पूजा और नमाज होती है। यह स्थिति गांव में धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।

यह परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे की मजबूत मिसाल बन चुकी है, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में होती है।

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