गुमला: जिले में मानसून शुरू होते ही सांपों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। लगातार बारिश के कारण उनके बिलों में पानी भरने से वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में बाहर निकल रहे हैं और खेत-खलिहान, सड़कों, झाड़ियों और घरों के आसपास दिखाई दे रहे हैं। इसको लेकर वन विभाग ने जिले में पाए जाने वाले 5 जहरीले सांपों की सूची जारी की है। वन विभाग के अनुसार गुमला में कॉमन इंडियन करैत, रसल वाइपर, स्पैक्टेकल कोबरा, धामिन, रॉक पाइथन सहित कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कॉमन इंडियन करैत, रसल वाइपर और कोबरा को सबसे ज्यादा खतरनाक माना गया है। ये तीनों सांप तेजी से हमला करने वाले और जानलेवा माने जाते हैं।
करैत सांप अक्सर रात के समय घरों में प्रवेश कर सोते हुए इंसानों को काट सकता है। रसल वाइपर को अत्यंत आक्रामक बताया गया है, जबकि कोबरा अपने फन के कारण आसानी से पहचाना जाता है। वहीं धामिन, अजगर और कॉमन सैंड बोआ जैसे सांप जहरीले नहीं होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आम लोग कुछ संकेतों से जहरीले सांप की पहचान कर सकते हैं, जैसे तिकोना सिर और चेहरे के पास पिट जैसा छिद्र। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल दिखावट के आधार पर पहचान पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास में न पड़ें और तुरंत अस्पताल पहुंचें। उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी स्नेक वेनम दवा उपलब्ध है और समय पर इलाज से जान बचाई जा सकती है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सर्पदंश के अधिकतर मामले ग्रामीण क्षेत्रों में लापरवाही और अंधविश्वास के कारण बढ़ते हैं। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि सांप किसानों के लिए उपयोगी भी होते हैं क्योंकि वे खेतों में चूहों और कीटों को नियंत्रित करते हैं।