जमशेदपुर : झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड में एक 65 वर्षीय बुजुर्ग की अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस में ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यदि सड़क की स्थिति बेहतर होती और समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। इस घटना के बाद इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क अवसंरचना को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
मृतक की पहचान संतोष कुंभकार (65 वर्ष) के रूप में हुई है, जो पटमदा प्रखंड के जोड़सा गांव के निवासी थे। बताया गया कि शनिवार को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने तुरंत राज्य सरकार की 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया। सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस गांव पहुंची और दोपहर करीब 1:50 बजे संतोष कुंभकार को इलाज के लिए माचा स्थित अस्पताल ले जाने के लिए रवाना हुई।
परिजनों के अनुसार, गांव से अस्पताल तक पहुंचने के लिए लगभग 10 किलोमीटर का रास्ता बेहद जर्जर है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, उबड़-खाबड़ सतह और खराब मार्ग के कारण एंबुलेंस को बहुत धीमी गति से चलना पड़ा। रास्ते में लगातार झटके लगने और यात्रा में देरी होने के कारण मरीज की हालत और गंभीर होती चली गई।
बताया जाता है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस के भीतर संतोष कुंभकार ने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। उनका कहना है कि यदि सड़क की हालत ठीक होती और एंबुलेंस समय पर अस्पताल पहुंच जाती, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और सड़क संपर्क की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की खराब सड़कें लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई हैं। बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे मरीजों, गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरतमंद लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क की मरम्मत और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं, जिसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र के कई गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। गंभीर मरीजों को दूर स्थित अस्पतालों में ले जाना पड़ता है, लेकिन खराब सड़कें इस प्रक्रिया को और कठिन बना देती हैं। ऐसे में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाता।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की सफलता केवल एंबुलेंस उपलब्ध होने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अच्छी सड़क, समय पर परिवहन और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि इनमें से किसी एक कड़ी में कमी होती है, तो मरीज के उपचार में देरी हो सकती है, जो कई मामलों में जानलेवा साबित होती है।
इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने सड़क की तत्काल मरम्मत और क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को ग्रामीण इलाकों में सड़क और चिकित्सा व्यवस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
हालांकि, इस मामले में प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उम्मीद की जा रही है कि संबंधित अधिकारी घटना की जांच करेंगे और यह पता लगाएंगे कि क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई या सड़क की खराब स्थिति ने मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाने में बाधा उत्पन्न की।
यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत ढांचे की चुनौतियों की ओर भी संकेत करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सड़क, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
फिलहाल संतोष कुंभकार के निधन से उनके परिवार में शोक का माहौल है। वहीं, ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह घटना प्रशासन और सरकार के लिए एक चेतावनी साबित होगी तथा क्षेत्र की सड़क और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी मरीज को समय पर इलाज न मिलने के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े।