कोडरमा में सुरक्षित रास्ते का संकट, खड़ी मालगाड़ी के नीचे से गुजरे जानकी यादव
आयोग अध्यक्ष ने उठाया ग्रामीणों का मुद्दा
कोडरमा: झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष और बरकट्ठा के पूर्व विधायक जानकी प्रसाद यादव के खड़ी मालगाड़ी के नीचे से रेंगकर रेलवे लाइन पार करने का मामला सामने आया है। घटना शुक्रवार शाम जयनगर प्रखंड की हीरोडीह पंचायत के रेभनाडीह गांव की है। रिपोर्ट के अनुसार, काफी देर इंतजार के बाद उन्होंने इस तरह दूसरी ओर जाने का रास्ता चुना। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षित आवागमन और रेलवे अंडरपास की मांग को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, खड़ी ट्रेन के नीचे से गुजरना बेहद जोखिमपूर्ण है।
जानकी यादव के अनुसार, रेलवे लाइन के दोनों ओर ग्रामीणों की खेती की जमीन है। आवाजाही प्रभावित होने से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि फुट ओवरब्रिज बनने के बावजूद उनकी जरूरतों का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। यादव ने धनबाद रेल मंडल के अधिकारियों से टीम भेजकर स्थल निरीक्षण और समाधान की पहल करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि विधायक रहते भी इस संबंध में रेल मंत्री को ज्ञापन दिया था। उपलब्ध रिपोर्ट में रेलवे का विस्तृत पक्ष या अंडरपास निर्माण की स्वीकृति का ब्योरा नहीं है।
सुरक्षित आवागमन की जरूरत पर केंद्रित मामला
यह घटना केवल एक व्यक्ति के रेलवे लाइन पार करने तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में लोगों की दैनिक आवाजाही के लिए उपयुक्त रास्ते का प्रश्न है। किसी बस्ती के बीच से रेलवे लाइन गुजरने पर दोनों ओर रहने वाले लोगों की जरूरतों को समझना आवश्यक होता है। रास्ता ऐसा होना चाहिए, जिसका उपयोग अलग-अलग आयु और शारीरिक क्षमता वाले लोग कर सकें। सुरक्षित विकल्प का आकलन करते समय केवल पैदल यात्रियों की संख्या पर्याप्त नहीं होती। खेती से जुड़ा सामान, छोटे वाहन, पशुओं की आवाजाही और आपातकालीन जरूरतें भी प्रासंगिक हो सकती हैं। रेभनाडीह में कौन-सी व्यवस्था सबसे उपयुक्त होगी, इसका निर्णय स्थल की वास्तविक परिस्थितियों और तकनीकी जांच के आधार पर होना चाहिए।
फुट ओवरब्रिज और अंडरपास की भूमिका अलग
फुट ओवरब्रिज पैदल यात्रियों को रेलवे लाइन के ऊपर से सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराता है। लेकिन सीढ़ियों का उपयोग प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान रूप से आसान नहीं होता। सामान लेकर चलने वाले लोगों, बुजुर्गों और चलने-फिरने में कठिनाई वाले व्यक्तियों की जरूरतें अलग हो सकती हैं।
अंडरपास की मांग का मूल्यांकन करते समय उसकी ऊंचाई, चौड़ाई, पहुंच मार्ग और जलनिकासी जैसी बातों पर विचार जरूरी है। निर्माण के बाद उसमें पानी भरने या पहुंच मार्ग बाधित रहने की स्थिति बने तो समस्या पूरी तरह दूर नहीं होगी। इसलिए किसी भी प्रस्ताव में निर्माण के साथ उसके उपयोग और रखरखाव की व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए।
खड़ी मालगाड़ी के नीचे से गुजरना खतरनाक
मालगाड़ी रुकी दिखाई देने पर भी उसके नीचे से रास्ता बनाना सुरक्षित नहीं है। ट्रेन कब आगे बढ़ेगी, इसकी जानकारी नीचे से गुजर रहे व्यक्ति को नहीं होती। अचानक होने वाली हलचल गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। बच्चों और अन्य लोगों द्वारा ऐसा दृश्य देखकर उसकी नकल करना भी जोखिम बढ़ा सकता है। किसी सार्वजनिक समस्या को सामने लाने का उद्देश्य महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन जोखिमपूर्ण तरीके को सामान्य आवागमन का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। समाधान मिलने तक लोगों को निर्धारित सुरक्षित रास्ते का उपयोग करना चाहिए। रेलवे लाइन की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर रास्ता बनाना भी स्थायी उपाय नहीं है।
स्थल निरीक्षण से स्पष्ट होंगे विकल्प
इस तरह की मांग पर संयुक्त स्थल निरीक्षण उपयोगी हो सकता है। उसमें रेलवे संचालन की जरूरतों के साथ स्थानीय लोगों की आवाजाही का अध्ययन किया जा सकता है। आसपास उपलब्ध वैकल्पिक रास्ते, बस्ती तक उनकी दूरी और मौजूदा फुट ओवरब्रिज की उपयोगिता भी देखी जा सकती है। निरीक्षण के बाद यदि अंडरपास तकनीकी रूप से संभव पाया जाए तो प्रस्ताव, स्वीकृति और निर्माण की प्रक्रिया स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि उसमें बाधाएं हों तो उनका कारण और व्यवहारिक विकल्प लोगों के सामने रखा जाना चाहिए। इससे अपेक्षाओं और वास्तविक प्रगति के बीच अंतर समझने में मदद मिलेगी।
संवाद और स्पष्ट समयसीमा की अहमियत
ग्रामीणों की शिकायतों पर नियमित संवाद ऐसी परिस्थितियों में महत्वपूर्ण होता है। संबंधित विभाग यदि मांग की स्थिति, आवश्यक परीक्षण और आगे की प्रक्रिया की जानकारी दें तो अनिश्चितता कम हो सकती है। केवल आश्वासन के बजाय जिम्मेदारी और अगले कदम की स्पष्टता अधिक उपयोगी होगी। फिलहाल रेभनाडीह का मामला सुरक्षित संपर्क मार्ग की जरूरत को सामने रखता है। आगे रेलवे और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होगा कि मांग पर क्या कार्रवाई होती है। किसी निर्माण की घोषणा या स्वीकृति आने तक उसे तय परियोजना बताना उचित नहीं होगा। लोगों की सुविधा के साथ दुर्घटना का जोखिम कम करना इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।