R&D पर बढ़ा फोकस, कोल इंडिया का फैसला

Update: 2026-07-01 09:42 GMT

Jharkhnd: कोल इंडिया ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी ने कहा है कि वर्ष 2030 तक आरएंडडी पर लगभग 1900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस निवेश का उद्देश्य कोयला उत्पादन को आधुनिक तकनीक से बढ़ाना, खनन को सुरक्षित बनाना और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा तकनीकों को विकसित करना है। कंपनी ने बताया कि हाल के वर्षों में आरएंडडी को लेकर उसकी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में नेशनल सेंटर फॉर कोल एंड एनर्जी रिसर्च (NACER) की स्थापना की गई, जिसके बाद अब कंपनी केवल शोध तक सीमित नहीं रहकर तकनीकों को जमीन पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

कोल इंडिया का आरएंडडी खर्च भी पिछले एक वर्ष में चार गुना बढ़ गया है। यह 61 करोड़ रुपये से बढ़कर 245 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कंपनी ने देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के साथ भी साझेदारी की है और आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी मद्रास तथा आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से 253 करोड़ रुपये की फंडिंग दी जाएगी।

धनबाद स्थित आईआईटी (आईएसएम) सहित इन संस्थानों के सहयोग से कोल इंडिया आधुनिक खनन तकनीक, कोयला गैसीकरण, कार्बन कैप्चर और रेयर अर्थ मिनरल्स की रिकवरी जैसे क्षेत्रों में शोध कर रही है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण और खदानों के पुन: उपयोग पर भी काम चल रहा है। फिलहाल कंपनी 19 बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट और 13 पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इनमें भूमिगत कोयला गैसीकरण, 5जी तकनीक आधारित खनन प्रणाली और ऑटोमेशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। कंपनी ने कनाडा, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया की संस्थाओं के साथ भी तकनीकी साझेदारी की है, जिससे वैश्विक स्तर की तकनीक का लाभ मिल सके।

कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस निवेश का उद्देश्य कोल इंडिया को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए तैयार करना है। आधुनिक तकनीक के जरिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने, लागत कम करने और खनन को सुरक्षित व टिकाऊ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारत की ऊर्जा जरूरतों में कोयले की अहम भूमिका को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बढ़ती मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच यह निवेश कोल इंडिया को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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