पंचतत्व में विलीन हुईं CM हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन, बेटे ने दी मुखाग्नि
रामगढ़। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित सोरेन परिवार के पैतृक गांव नेमरा में उनका अंतिम संस्कार किया गया। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को अपराह्न करीब 3:30 बजे नेमरा के ढेकानाला घाट पर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं। पुत्र एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां को मुखाग्नि दी। यह क्षण परिवार के लिए बेहद भावुक था, क्योंकि लगभग 13 महीने पहले इसी स्थान पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का भी अंतिम संस्कार किया गया था। पिता के निधन के बाद अब मां को खो देने से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। रूपी सोरेन के निधन से झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी शोक का माहौल है।
नेमरा के ढेकानाला घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार गुरुवार को उनके पैतृक गांव नेमरा में किया गया।
गांव के ढेकानाला घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई थी। यह वही स्थान है, जहां पिछले वर्ष दिशोम गुरु शिबू सोरेन को अंतिम विदाई दी गई थी।
दोपहर बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। करीब 3:30 बजे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां को मुखाग्नि दी।
शाम पांच बजे तक अंतिम संस्कार की रस्में पूरी होने के साथ रूपी सोरेन अपने पुरखों की माटी में विलीन हो गईं।
सोरेन परिवार के लिए यह अत्यंत दुखद क्षण था।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी मां को मुखाग्नि
अंतिम संस्कार के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुत्र का दायित्व निभाते हुए अपनी मां को मुखाग्नि दी।
मां के निधन से मुख्यमंत्री बेहद भावुक नजर आए। पिता शिबू सोरेन के निधन के लगभग 13 महीने बाद उन्हें मां को भी अंतिम विदाई देनी पड़ी।
रूपी सोरेन परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा थीं।
उनके निधन के बाद मुख्यमंत्री ने मां के साथ बिताए समय और परिवार के जीवन में उनकी भूमिका को याद किया।
परिजनों के लिए यह क्षण विशेष रूप से कठिन रहा।
13 महीने पहले पिता को दी थी अंतिम विदाई
नेमरा का ढेकानाला घाट सोरेन परिवार के लिए गहरी स्मृतियों से जुड़ा हुआ है।
पिछले वर्ष 4 अगस्त 2025 को दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन हुआ था। इसके अगले दिन 5 अगस्त को नेमरा गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उनके निधन के बाद पूरे प्रदेश में शोक व्यक्त किया गया था।
अब उसी घाट के समीप उनकी पत्नी रूपी सोरेन का भी अंतिम संस्कार किया गया।
इस तरह लगभग 13 महीने के भीतर सोरेन परिवार ने अपने दो वरिष्ठ सदस्यों को खो दिया।
बुधवार को रांची में हुआ था निधन
रूपी सोरेन का निधन बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को रांची के एक निजी अस्पताल में हुआ था।
रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वह 18 सितंबर से रांची के हिल व्यू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में उपचाराधीन थीं।
चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा था, लेकिन बुधवार को उनका निधन हो गया।
उनके निधन की सूचना मिलते ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों में शोक फैल गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार के लिए यह बड़ी व्यक्तिगत क्षति है।
अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे लोग
रूपी सोरेन के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को रांची के मोरहाबादी स्थित मुख्यमंत्री आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था।
यहां विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और शुभचिंतकों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद गुरुवार को पार्थिव शरीर पैतृक गांव नेमरा ले जाया गया।
गांव में भी अंतिम विदाई की तैयारियां की गई थीं।
परिवार के सदस्यों के साथ स्थानीय लोगों ने रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की।
नेमरा गांव में की गई थीं विशेष तैयारियां
रूपी सोरेन के अंतिम संस्कार को लेकर रामगढ़ जिला प्रशासन ने पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं।
गुरुवार सुबह से ही नेमरा गांव में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।
अंतिम संस्कार में राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने आवश्यक इंतजाम किए।
पैतृक गांव में परिवार की परंपराओं के अनुसार अंतिम विदाई की व्यवस्था की गई थी।
ढेकानाला घाट पर भी अंतिम संस्कार से संबंधित तैयारियां पूरी की गई थीं।
सोरेन परिवार के संघर्षों की साक्षी रहीं रूपी सोरेन
रूपी सोरेन का जीवन झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास से भी जुड़ा रहा।
वह दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी थीं, जिन्होंने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक संघर्ष के दौरान रूपी सोरेन ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं।
उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन में कई राजनीतिक और सामाजिक बदलावों का दौर देखा।
शिबू सोरेन के राजनीतिक जीवन के साथ उनका परिवार भी झारखंड की सार्वजनिक पहचान का हिस्सा बना।
रूपी सोरेन अपने परिवार और सामाजिक जीवन से जुड़े कार्यों के लिए जानी जाती थीं।
राजनीति में भी आजमा चुकी थीं किस्मत
रूपी सोरेन केवल एक राजनीतिक परिवार की सदस्य ही नहीं थीं, बल्कि उन्होंने स्वयं भी चुनावी राजनीति में भाग लिया था।
वर्ष 1999 में उन्होंने अविभाजित बिहार के समय दुमका लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।
हालांकि, उस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिली थी।
इसके बाद वह सक्रिय चुनावी राजनीति में प्रमुख भूमिका में नहीं रहीं।
उनकी पहचान मुख्य रूप से शिबू सोरेन के जीवनसाथी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां के रूप में रही।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी जताया शोक
रूपी सोरेन के निधन पर देश के प्रमुख नेताओं ने भी संवेदना व्यक्त की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर दुख जताया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी सोरेन परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
नेताओं ने इस कठिन समय में परिवार को संबल मिलने की कामना की।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि दी।
पिता के बाद मां का साया भी उठा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए पिछले लगभग 13 महीने व्यक्तिगत रूप से बेहद कठिन रहे हैं।
अगस्त 2025 में पिता शिबू सोरेन के निधन के बाद अब अक्टूबर 2026 में मां रूपी सोरेन का भी निधन हो गया।
हेमंत सोरेन ने अपने पिता के राजनीतिक संघर्ष और परिवार में मां की महत्वपूर्ण भूमिका को विभिन्न अवसरों पर याद किया है।
मां के निधन के बाद उन्होंने भावुक संदेश के माध्यम से अपने दुख को व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि पिता के बाद मां उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा थीं।
इस दुखद घटना ने सोरेन परिवार को गहराई से प्रभावित किया है।
नेमरा से जुड़ी हैं परिवार की गहरी यादें
रामगढ़ जिले का नेमरा गांव सोरेन परिवार की पैतृक पहचान से जुड़ा हुआ है।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का इस गांव से गहरा संबंध रहा है।
झारखंड की राजनीति में प्रमुख स्थान बनाने के बावजूद परिवार का अपने पैतृक गांव से जुड़ाव बना रहा।
शिबू सोरेन के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार भी इसी गांव में किया गया था।
अब रूपी सोरेन की अंतिम विदाई भी नेमरा में होने से यह स्थान परिवार की स्मृतियों से और गहराई से जुड़ गया है।
शाम तक पूरी हुईं अंतिम संस्कार की रस्में
गुरुवार दोपहर नेमरा के ढेकानाला घाट पर रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार किया गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लगभग 3:30 बजे अपनी मां को मुखाग्नि दी।
इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ी और शाम पांच बजे तक प्रमुख रस्में पूरी हो गईं।
लगभग 13 महीने पहले इसी घाट पर शिबू सोरेन को अंतिम विदाई दी गई थी।
अब उसी स्थान के समीप रूपी सोरेन भी पंचतत्व में विलीन हो गईं।
माता-पिता के निधन के बीच महज 13 महीने का अंतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के लिए गहरी व्यक्तिगत क्षति है। नेमरा में रूपी सोरेन की अंतिम विदाई के साथ झारखंड के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार के जीवन का भावुक अध्याय समाप्त हो गया।