पीएम आवास के लाभुकों को अब देना होगा प्रॉपर्टी टैक्स, नगर विकास विभाग ने मांगी जानकारी
धनबाद। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने वाले लाभुकों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। अब पीएम आवास में रहने वाले लाभुकों को भी प्रॉपर्टी टैक्स यानी होल्डिंग टैक्स देना अनिवार्य होगा। अभी तक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों में रहने वाले कुछ लाभुक ही नगर निगम को होल्डिंग टैक्स का भुगतान कर रहे थे। लेकिन ऑडिट विभाग की आपत्ति के बाद इस मामले में नगर विकास विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने धनबाद नगर निगम को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों और उनमें रहने वाले लाभुकों की विस्तृत जानकारी मांगी है।
नगर विकास विभाग की ओर से पत्र मिलने के बाद नगर निगम स्तर पर पीएम आवास के लाभुकों का रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। निगम को यह पता लगाना होगा कि उसके क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कितने मकान बनाए गए हैं, इनमें कितने लाभुक वर्तमान में रह रहे हैं और कितने लाभुक नगर निगम को नियमित रूप से होल्डिंग टैक्स का भुगतान कर रहे हैं।
अब तक स्थिति यह थी कि पीएम आवास योजना के तहत घर पाने वाले सभी लाभुकों से समान रूप से होल्डिंग टैक्स की वसूली नहीं हो रही थी। कुछ लाभुकों ने अपने मकान का होल्डिंग नंबर लेकर टैक्स जमा करना शुरू कर दिया था, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे मकान भी बताए जा रहे हैं जिनसे नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स नहीं मिल रहा था। ऑडिट के दौरान इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए। ऑडिट विभाग की आपत्ति के बाद नगर विकास विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम से जानकारी तलब की है।
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। योजना के तहत पात्र लाभुकों को सरकारी सहायता दी जाती है, जिससे वे अपना घर बना सकें या निर्धारित योजना के तहत आवास प्राप्त कर सकें। लेकिन आवास बन जाने और उसमें लाभुक के रहने के बाद नगर निकाय क्षेत्र में लागू संपत्ति कर की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
नगर निगम क्षेत्र में स्थित आवासीय संपत्तियों पर निर्धारित नियमों के अनुसार होल्डिंग या प्रॉपर्टी टैक्स लिया जाता है। इससे प्राप्त राशि नगर निगम की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसी राशि का उपयोग शहर में सफाई, सड़क, स्ट्रीट लाइट, नाली, पेयजल और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में किया जाता है। ऐसे में पीएम आवास के लाभुकों को भी टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है।
नगर विकास विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी के आधार पर धनबाद नगर निगम पीएम आवासों की सूची तैयार कर सकता है। इसके बाद जिन आवासों का अब तक होल्डिंग नंबर नहीं बना है, उनकी पहचान की जा सकती है। साथ ही यह भी पता लगाया जा सकता है कि किन लाभुकों ने टैक्स जमा किया है और किनका भुगतान बाकी है।
इस फैसले का असर प्रधानमंत्री आवास योजना के उन लाभुकों पर अधिक पड़ेगा, जिन्होंने अभी तक प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान शुरू नहीं किया है। ऐसे लोगों को आने वाले समय में अपने आवास का होल्डिंग निर्धारण कराने और नगर निगम के नियमों के मुताबिक टैक्स जमा करने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। हालांकि लाभुकों से कितनी राशि ली जाएगी और टैक्स की गणना किस आधार पर होगी, यह संबंधित नगर निकाय के लागू नियमों और संपत्ति के निर्धारण पर निर्भर करेगा।
ऑडिट विभाग की आपत्ति का प्रमुख बिंदु यह है कि नगर निगम क्षेत्र में मौजूद संपत्तियों के टैक्स रिकॉर्ड में समान व्यवस्था होनी चाहिए। अगर कुछ पीएम आवास लाभुक टैक्स दे रहे हैं और कुछ नहीं दे रहे हैं तो रिकॉर्ड और राजस्व व्यवस्था में अंतर पैदा होता है। इसी कारण सभी संबंधित आवासों का विवरण जुटाकर स्थिति स्पष्ट करने की कवायद शुरू की गई है।
नगर विकास विभाग के निर्देश के बाद नगर निगम के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम पीएम आवास के लाभुकों का सही आंकड़ा जुटाना होगा। इसमें योजना के तहत बने आवास, लाभुक का विवरण, मकान की स्थिति, होल्डिंग नंबर और अब तक जमा किए गए टैक्स जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं। रिकॉर्ड तैयार होने के बाद आगे की कार्रवाई विभागीय निर्देश और नगर निगम के नियमों के अनुसार की जाएगी।
नई व्यवस्था से नगर निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। पीएम आवास योजना के तहत बने सभी पात्र मकानों को होल्डिंग टैक्स के दायरे में लाने से निगम को नियमित राजस्व प्राप्त हो सकेगा। हालांकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लाभुकों पर पड़ने वाले वित्तीय असर को लेकर भी लोगों की नजर विभाग के अगले निर्देशों पर रहेगी।
फिलहाल नगर विकास विभाग द्वारा धनबाद नगर निगम से पीएम आवास में रहने वाले लोगों की जानकारी मांगे जाने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। अब नगर निगम द्वारा तैयार किए जाने वाले आंकड़ों और विभाग के अगले निर्देश के बाद यह स्पष्ट होगा कि टैक्स वसूली की प्रक्रिया किस तरह लागू की जाएगी और पहले से टैक्स जमा नहीं करने वाले लाभुकों के मामले में क्या कदम उठाए जाएंगे।