हादसे के बाद 12 मजदूरों की सुरक्षित वापसी

Update: 2026-06-30 15:01 GMT

धनबाद: तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में हुए अमोनिया गैस रिसाव हादसे के बाद धनबाद के प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित घर वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस घटना में फंसे धनबाद के 12 मजदूर मंगलवार को अपने घर के लिए रवाना होंगे। वहीं हादसे में जान गंवाने वाले एक मजदूर का शव हवाई मार्ग से झारखंड लाया जाएगा। प्रशासन ने मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है।

जिला प्रशासन और श्रम विभाग की पहल पर मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई है। सहायक श्रम आयुक्त प्रवीण कुमार ने बताया कि तमिलनाडु सरकार और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से सभी मजदूरों को सुरक्षित घर भेजने की व्यवस्था की गई है। मजदूरों की सुरक्षा और यात्रा को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जानकारी के अनुसार, सभी 12 मजदूर धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस से वापस लौटेंगे। प्रशासन ने कहा है कि यात्रा के दौरान और उसके बाद भी मजदूरों के संपर्क में रहकर उनकी स्थिति पर नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर आगे भी हर संभव सहायता दी जाएगी। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर के परिजनों को तमिलनाडु सरकार की ओर से दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। यह राशि जिला प्रशासन के माध्यम से परिवार तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा शव को झारखंड लाने के लिए तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता भी उपलब्ध कराई गई है। शव के धनबाद पहुंचने के बाद परिजनों को एक लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता देने की भी घोषणा की गई है।

यह हादसा 21 जून को तिरुवल्लूर जिले की एक सी-फूड प्रोसेसिंग यूनिट में हुआ था, जहां अमोनिया गैस रिसाव के कारण बड़ी संख्या में मजदूर प्रभावित हुए थे। अचानक गैस फैलने से फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी और कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए थे। घायलों को तत्काल अस्पतालों और राहत शिविरों में भर्ती कराया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हादसे में कुल 83 श्रमिक प्रभावित हुए थे, जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर 16 तक पहुंच गई है। इनमें झारखंड, ओडिशा और असम सहित कई राज्यों के मजदूर शामिल हैं। झारखंड के 42 मजदूरों को राहत शिविरों में रखा गया था, जिनमें से अधिकांश अब सुरक्षित घर लौट रहे हैं।

धनबाद जिला प्रशासन ने कहा है कि वह लगातार तमिलनाडु प्रशासन के संपर्क में है और सभी प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और मजदूरों की सुरक्षित वापसी प्राथमिकता है। इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक प्रयासों के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि सभी मजदूर सुरक्षित अपने घर पहुंचें और पीड़ित परिवारों को समय पर राहत मिल सके।

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