कश्मीरी पंडित नर्स हत्या मामले में यासीन मलिक का बड़ा बयान
यासीन मलिक बोला मौत की सजा के लिए तैयार
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) प्रमुख यासीन मलिक ने कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्याकांड मामले में अपना बचाव करने से इनकार कर दिया है। तिहाड़ जेल में बंद मलिक ने श्रीनगर की विशेष अदालत में 25 पन्नों का हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह मुकदमे की आगे की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेना चाहता और अपने लिए मृत्युदंड की मांग करता है।
यासीन मलिक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। उसने दावा किया है कि वह इस मामले में निर्दोष है और उसे राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है। मलिक ने कहा कि मुकदमा नहीं लड़ने के उसके फैसले को अपराध स्वीकार करना नहीं माना जाना चाहिए।
यह मामला वर्ष 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या से जुड़ा है। सरला भट्ट की हत्या उस दौर में हुई थी जब घाटी में आतंकवाद बढ़ रहा था और कश्मीरी पंडित समुदाय बड़े पैमाने पर विस्थापन का सामना कर रहा था। इस मामले में जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने यासीन मलिक समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। अपने हलफनामे में मलिक ने दावा किया कि घटना के समय वह खुद गंभीर रूप से घायल था और ऐसी स्थिति में किसी वारदात की साजिश रचने या उसे अंजाम देने का आरोप गलत है। उसने सरला भट्ट को निर्दोष नागरिक बताया और अपनी भूमिका से इनकार किया।
मलिक के इस बयान के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सुरक्षा एजेंसियों और पीड़ित परिवारों की ओर से लंबे समय से इस मामले में न्याय की मांग की जाती रही है। वहीं, अदालत अब मामले में उपलब्ध सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। यासीन मलिक पहले से ही टेरर फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। अब सरला भट्ट हत्याकांड मामले में उसके नए रुख ने कानूनी प्रक्रिया को एक नया मोड़ दे दिया है।