जम्मू-कश्मीर के लोगों के हित को देंगे प्राथमिकता

Update: 2025-10-28 15:59 GMT
Jammu जम्मू-कश्मीर: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य में भूमि संबंधी संभावित विधेयकों पर कड़ा रुख अपनाया है और कहा है कि किसी भी ऐसे बिल का समर्थन नहीं करेंगे जो भूमि माफिया या अवैध कब्जाधारियों के हित में हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी नीतियाँ और कानून केवल सियासी फायदे के लिए लाए जा रहे हैं तो वे जम्मू-कश्मीर और उसके लोगों को नुकसान पहुंचाएंगे। गाँदरबल में आयोजित एक सार्वजनिक सभा और प्रशासनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट कहा, “जो बिल लैंड माफिया की मदद करने के लिए हो, जिन लोगों ने गैरकानूनी तरीके से जमीन पर कब्ज़ा किया हो उनके लिए जो बिल हो — ऐसे बिल को हम पास कैसे कर सकते हैं। जो बिल सिर्फ सियासत के लिए लाया गया हो उससे जम्मू-कश्मीर के लोगों को नुकसान है। ऐसा बिल लाएं जिससे जम्मू-कश्मीर के लोगों को फायदा हो।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी नए विधेयक का उद्देश्य पारदर्शिता, सार्वजनिक हित और कानूनी मानदंडों का संरक्षण होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भूमि रिकॉर्ड की समीक्षा, पुख्ता सत्यापन और स्थानीय समुदायों की विचार-विमर्श प्रक्रियाओं को सुनिश्चित किए बिना कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा। उमर अब्दुल्ला ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे भूमि से जुड़े मामलों में पूरी तरह संवेदनशील और न्यायसंगत रवैया अपनाएं ताकि किसी भी तरह की अनियमितता और दलाली के अवसर समाप्त हों।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भूमि पर अवैध कब्जे की समस्या को हल करने के लिए प्रशासनिक और कानूनी दोनों उपायों की ज़रूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास परियोजनाओं के हित में यदि ज़मीन का उपयोग करना चाहती है तो पहले वितरण-विनिमय की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी और प्रभावित परिवारों को न्यायोचित मुआवजा तथा विकल्प प्रदान किए जाएंगे। उमर अब्दुल्ला ने विरोधाभासपूर्ण या जल्दबाज़ी में लाए गए प्रस्तावों के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी नीतियाँ सामाजिक शांति और तहसीली स्तर पर भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से भी आवाह्न किया कि भूमि और संपत्ति से जुड़े किसी भी मसले पर संवेदनशीलता और नागरिक अधिकारों का सम्मान करते हुए बहस करें।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि यदि इसी तरह पारदर्शिता और लोकहित को प्राथमिकता दी गई तो भूमि विवादों का स्थायी समाधान संभव है। वहीं कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, सर्वे-आधारित सत्यापन और न्यायिक तंत्र में त्वरित सुनवाई के माध्यम से अवैध कब्जों और माफिया के दखल को कम किया जा सकता है। सरकार ने संकेत दिया है कि आगामी दिनों में भूमि मामलों से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तृत सार्वजनिक परामर्श आयोजित किए जाएंगे और किसी भी विधेयक को मंजूरी देने से पहले व्यापक जांच और स्थानीय हितधारकों की सहमति आवश्यक मानी जाएगी।
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