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जम्मू में मीडिया से बात करते हुए एनसी अध्यक्ष ने कहा कि जहां तक पहलगाम हमले के खिलाफ भारत की कार्रवाई का सवाल है, सरकार को पूरा समर्थन दिया गया है। उन्होंने कहा, "अब प्रधानमंत्री को जो भी उचित लगे, वह कार्रवाई करनी है, क्योंकि हमने (विपक्ष ने) उन्हें पूरा समर्थन दिया है।" आगे का रास्ता क्या हो सकता है, इस बारे में पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "आतंकवाद हमें स्वीकार्य नहीं है। उन्हें (पाकिस्तान को) यह समझने की जरूरत है कि यह हमें निगल रहा है और आपको (पाकिस्तान को) भी खत्म कर रहा है। उसे (पाकिस्तान को) यह समझने का समय आ गया है। जब मुंबई पर हमला हुआ, तो उसने (पाकिस्तान ने) कहा कि वह इसमें शामिल नहीं है। बाद में, उसका हाथ साबित हुआ। वह पठानकोट और उरी में हुए हमलों में भी शामिल था। हमलों की सूची, जिसमें वह (पाकिस्तान) शामिल था, लंबी है।" फारूक ने चेतावनी देते हुए कहा, 'कारगिल में जब उन्होंने (पाकिस्तान ने) हमला किया, तो उन्होंने फिर से अपनी संलिप्तता से इनकार किया।
मैं उस समय (जम्मू-कश्मीर का) मुख्यमंत्री था। अपनी आसन्न हार को देखते हुए उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति (बिल) क्लिंटन से संपर्क किया और अपनी संलिप्तता स्वीकार की तथा वापस जाने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। इसे समाप्त करने का समय आ गया है। यदि वे (पाकिस्तान) मैत्रीपूर्ण संबंध चाहते हैं तो यह (आतंक की) नीति काम नहीं आएगी। उन्हें आतंकवाद के अभिशाप को समाप्त करना होगा। लेकिन यदि वे दुश्मनी चाहते हैं तो दोनों पक्ष तैयार हैं।' पहलगाम आतंकी हमले पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया तथा एकजुट रुख की आवश्यकता के बारे में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'विपक्षी दलों ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, जहां पूरा भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर सके।' युद्ध की स्थिति में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की पाकिस्तान की धमकी के बारे में पूछे जाने पर फारूक ने कहा कि भारत के पास यह तब से था, जब पाकिस्तान ने इसे हासिल नहीं किया था। फारूक ने कहा, "मुझे अभी भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का पोखरण में कहा गया वह कथन याद है कि भारत कभी भी किसी देश के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल पहले नहीं करेगा। हम इसका इस्तेमाल तभी करेंगे जब हम पर हमला होगा। भारत ने कभी किसी देश पर पहले हमला नहीं किया है। हम आज भी उस नीति पर कायम हैं। लेकिन अगर वह (पाकिस्तान) इसका इस्तेमाल करता है, तो हम जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। हम भी एक परमाणु-सक्षम देश हैं। लेकिन मैं चाहता हूं कि वह क्षण (परमाणु हमला) कभी न आए।"