अखनूर: कस्बे में आवारा और खुले में छोड़ी जा रही भैंसें स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही हैं। रोजाना स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय भैंसों के झुंड मुख्य सड़कों पर उतर आते हैं। इसके चलते पन्नू चौक से अखनूर तक यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई बार वाहनों की लंबी कतार लगने से जाम जैसी स्थिति बन जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, अभिभावकों, कर्मचारियों और दोपहिया वाहन चालकों को उठानी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह स्कूल जाने के समय बड़ी संख्या में भैंसों को सड़क की ओर छोड़ दिया जाता है। ये पशु बिना किसी देखरेख के बाजार और मुख्य सड़क के बीच घूमते रहते हैं। इनके साथ कोई पशुपालक या जिम्मेदार व्यक्ति दिखाई नहीं देता। रोजाना लगभग एक ही समय पर भैंसों के सड़क पर आने से समस्या नियमित होती जा रही है।

स्कूल के समय सड़क पर उतर रहे झुंड

स्थानीय लोगों के मुताबिक सुबह स्कूलों के खुलने का समय होते ही भैंसों के झुंड सड़क पर दिखाई देने लगते हैं। इसी समय बड़ी संख्या में स्कूली बसें, निजी वाहन, ऑटो, दोपहिया वाहन और पैदल बच्चे सड़कों पर होते हैं।

भैंसों के बीच सड़क पर आने से वाहनों को अपनी रफ्तार कम करनी पड़ती है। कई बार पूरा झुंड सड़क घेर लेता है, जिससे वाहनों के निकलने के लिए जगह नहीं बचती।

स्कूलों की छुट्टी के समय भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है।

पन्नू चौक से अखनूर तक यातायात प्रभावित

भैंसों के कारण पन्नू चौक से अखनूर तक यातायात व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। व्यस्त समय में सड़क पर पहले से वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में अचानक पशुओं का झुंड पहुंचने से वाहनों की आवाजाही धीमी हो जाती है।

एक तरफ स्कूली बच्चों और अभिभावकों की भीड़ रहती है तो दूसरी ओर नियमित यातायात भी जारी रहता है। भैंसों के सड़क के बीच खड़े होने से वाहन चालकों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार इसके कारण सड़क पर वाहनों की कतार लग जाती है।

बच्चों के लिए बढ़ रहा खतरा

सड़क पर खुले घूम रहे पशु स्कूली बच्चों के लिए भी खतरा बन सकते हैं। छोटे बच्चे अचानक सामने पशु आने पर घबरा सकते हैं। वहीं दोपहिया वाहन से बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहे अभिभावकों के लिए भी संतुलन बिगड़ने का जोखिम रहता है।

भैंसों के अचानक सड़क पार करने या दिशा बदलने की स्थिति में वाहन चालक को अचानक ब्रेक लगाना पड़ सकता है। इससे पीछे आ रहे वाहन के टकराने का खतरा भी बढ़ जाता है।

लोगों का कहना है कि स्कूल के व्यस्त समय में ऐसी स्थिति किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।

साथ में नहीं दिखाई देता कोई पशुपालक

स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि सड़क पर घूमने वाली भैंसों के साथ कोई व्यक्ति दिखाई नहीं देता। पशुओं को नियंत्रित करने वाला कोई नहीं होने के कारण वे अपनी मर्जी से सड़क और बाजार में घूमती रहती हैं।

यदि कोई पशु अचानक वाहन की ओर बढ़ता है या सड़क के बीच बैठ जाता है तो उसे हटाने के लिए वाहन चालकों को खुद प्रयास करना पड़ता है।

लोगों का कहना है कि पशुओं को खुले में छोड़ने वालों की पहचान कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

रोज एक ही समय पर सामने आ रही समस्या

स्थानीय लोगों के अनुसार भैंसों के सड़क पर आने का समय लगभग रोजाना एक जैसा रहता है। इससे लोगों में सवाल उठ रहा है कि यदि समस्या नियमित है तो इसे रोकने के लिए पहले से व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही।

सुबह स्कूल खुलने और दोपहर में छुट्टी होने के समय यातायात का दबाव सबसे अधिक रहता है। इसी दौरान पशुओं के सड़क पर आने से परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।

लोगों का कहना है कि इन निर्धारित समयों पर निगरानी रखकर समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

दोपहिया वाहन चालकों को ज्यादा परेशानी

भैंसों के झुंड के कारण सबसे अधिक जोखिम दोपहिया वाहन चालकों के लिए रहता है। सड़क पर पशु के अचानक सामने आने पर बाइक या स्कूटी चालक को तेजी से ब्रेक लगाना पड़ सकता है।

बरसात या सड़क पर मिट्टी होने की स्थिति में वाहन फिसलने का खतरा और बढ़ जाता है। रात के समय कम रोशनी में भी पशुओं को दूर से पहचानना मुश्किल हो सकता है।

स्थानीय वाहन चालकों ने सड़क पर पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

बाजार क्षेत्र में भी बढ़ रही परेशानी

मुख्य सड़क के अलावा बाजार क्षेत्र में भी खुले घूम रहे पशुओं से लोगों को परेशानी हो रही है। भीड़भाड़ वाले बाजार में भैंसों के पहुंचने से पैदल चलने वालों और दुकानदारों को दिक्कत होती है।

बाजार में पहले से सीमित जगह होने के कारण पशुओं का झुंड पहुंचने पर आवाजाही और कठिन हो जाती है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पशुओं को नियंत्रित करने के लिए नियमित अभियान चलाया जाना चाहिए।

जाम के कारण समय पर स्कूल पहुंचना मुश्किल

स्कूल जाने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए समय काफी महत्वपूर्ण होता है। सुबह कुछ मिनट का जाम भी बच्चों को स्कूल पहुंचने में देरी करा सकता है।

भैंसों के झुंड के कारण वाहन धीरे-धीरे निकलते हैं और पीछे लंबी कतार बन जाती है। इससे स्कूल बसों और अन्य वाहनों को भी परेशानी होती है।

नौकरी और दूसरे जरूरी काम के लिए निकलने वाले लोगों को भी जाम के कारण देरी का सामना करना पड़ रहा है।

पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करने की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि ये पशु किसके हैं और उन्हें रोजाना खुले में कौन छोड़ रहा है। पशुपालकों को अपने पशुओं की निगरानी और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

मुख्य सड़क पर पशुओं को बिना देखरेख छोड़ने से यातायात बाधित होने के साथ हादसे का खतरा पैदा होता है।

लोगों ने मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले पशुपालकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

स्थानीय लोगों ने मांगा स्थायी समाधान

अखनूर के लोगों का कहना है कि यह समस्या अब रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। केवल पशुओं को एक बार सड़क से हटाने से इसका स्थायी समाधान नहीं होगा।

इसके लिए पशुपालकों की पहचान, नियमित निगरानी और स्कूल के समय विशेष व्यवस्था करने की जरूरत है। मुख्य सड़क और बाजार क्षेत्र में पशुओं को खुले में घूमने से रोकने के लिए संबंधित विभागों को संयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए।

लोगों का कहना है कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो किसी दिन बड़ा सड़क हादसा हो सकता है। फिलहाल पन्नू चौक से अखनूर तक स्कूल के व्यस्त समय में भैंसों के झुंड से यातायात प्रभावित होना लोगों के लिए गंभीर परेशानी बना हुआ है।

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