JAMMU.जम्मू: पीओजेके (पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर) से विस्थापित परिवारों ने दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में बैसाखी पर्व बड़े उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव के साथ मनाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समुदाय के लोग एकत्र हुए और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। लोगों ने एक-दूसरे को बैसाखी की शुभकामनाएं दीं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को याद किया।
वक्ताओं ने कहा कि बैसाखी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि नई शुरुआत और एकता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि विस्थापित परिवारों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी परंपराओं और संस्कृति को जीवित रखा है।
कार्यक्रम में पीओजेके विस्थापित समुदाय के लोगों ने अपने संघर्षों और अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने सरकार से अपने पुनर्वास और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की।
सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने इस आयोजन का समर्थन किया और इसे समुदाय की एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम बताया।
आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में भी मदद करते हैं।
कुल मिलाकर, दिल्ली और एनसीआर में पीओजेके विस्थापित परिवारों द्वारा मनाया गया बैसाखी पर्व एकता, संस्कृति और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बनकर सामने आया, जिसने समुदाय के लोगों को एक साथ जोड़ने का कार्य किया।