श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के दौरे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। गोर ने अपनी यात्रा के दौरान कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके इस बयान को भारत के लंबे समय से चले आ रहे रुख को अमेरिकी समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। बैठक के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों, क्षेत्रीय विकास और जम्मू-कश्मीर में आर्थिक अवसरों को लेकर चर्चा हुई। गोर ने जम्मू-कश्मीर की सुंदरता और सुरक्षा स्थिति का भी उल्लेख किया।
सर्जियो गोर का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह 2019 के बाद किसी मौजूदा अमेरिकी राजदूत की जम्मू-कश्मीर की पहली स्वतंत्र यात्रा बताई जा रही है। भारत के लिए यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश करता रहा है।
गोर के बयान के बाद पाकिस्तान की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक के समक्ष इस बयान को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। इस घटनाक्रम को कश्मीर मुद्दे पर दोनों देशों के अलग-अलग रुख के बीच कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
इस दौरे के दौरान अमेरिकी राजदूत ने जम्मू-कश्मीर के लिए जारी अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा की बात भी कही। उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्र में बेहतर सुरक्षा माहौल को देखते हुए यात्रा संबंधी दिशा-निर्देशों में बदलाव पर विचार किया जा सकता है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अमेरिकी राजदूत से मुलाकात से पहले कहा था कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दों का समाधान भारत सरकार और स्थानीय स्तर पर ही होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी विदेशी प्रतिनिधि के सामने घरेलू मामलों को शिकायत के रूप में नहीं उठाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जियो गोर का श्रीनगर दौरा केवल एक राजनयिक मुलाकात नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में जम्मू-कश्मीर की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। अमेरिका की ओर से आया यह बयान पाकिस्तान और अलगाववादी समूहों के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है, जो कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में पेश करने की कोशिश करते रहे हैं। अब नजर इस बात पर है कि इस दौरे के बाद भारत-अमेरिका सहयोग, पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर को कितना फायदा मिलता है।
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