श्रीनगर। नियंत्रण रेखा (LoC) के बेहद संवेदनशील तंगधार सेक्टर में आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (AFMS) के डॉक्टरों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच दो दिनों में 220 लोगों की आंखों की सफल सर्जरी की। ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के तहत आयोजित 10वें मेगा आई सर्जिकल कैंप को LoC पर अपनी तरह का पहला बड़ा नेत्र सर्जरी शिविर बताया गया है। खास बात यह रही कि गोलाबारी के खतरे को देखते हुए डॉक्टरों ने जमीन के नीचे बनाए गए सुरक्षित ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी की।तंगधार और कर्नाह क्षेत्र भौगोलिक रूप से दुर्गम होने के साथ नियंत्रण रेखा के बेहद करीब स्थित हैं। यहां विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना आसान नहीं है। पहाड़ी रास्ते, मौसम और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को आंखों की जटिल बीमारियों के इलाज और सर्जरी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के तहत मेगा आई सर्जिकल कैंप आयोजित किया गया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक दो दिनों के भीतर 220 नेत्र सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गईं। इनमें सबसे अधिक मोतियाबिंद की सर्जरी थीं। इसके अलावा रेटिना से संबंधित कुछ प्रक्रियाएं और मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी (MIGS) भी की गईं।आंखों की माइक्रो-सर्जरी में बेहद सावधानी, स्थिर वातावरण और विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है। तंगधार जैसी संवेदनशील जगह पर इस स्तर का सर्जिकल कैंप आयोजित करना इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा संबंधी खतरे को ध्यान में रखना पड़ा।
कैंप के लिए जमीन के नीचे सुरक्षित ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था की गई थी। इसका उद्देश्य संभावित गोलाबारी के बीच डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इसी सुरक्षित वातावरण में विशेषज्ञ सर्जनों ने लगातार दो दिनों तक ऑपरेशन किए।तंगधार कुपवाड़ा जिले के कर्नाह क्षेत्र में आता है और नियंत्रण रेखा के नजदीक होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। आधिकारिक जानकारी में कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी यह इलाका भारी गोलाबारी से प्रभावित हुआ था। दावा है कि तीन दिनों की अवधि में इस सेक्टर में करीब 1,500 गोले गिरे थे। इस आंकड़े को संबंधित अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस इलाके में चिकित्सा ढांचे की सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण है। हाल में क्षेत्र के एक फॉरवर्ड सर्जिकल सेंटर पर हमले की घटना का उल्लेख करते हुए अधिकारियों ने बताया कि ऐसी परिस्थितियां सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षित चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।मेगा आई कैंप के दौरान भी ऑपरेशन थिएटर को संभावित खतरे से पूरी तरह मुक्त नहीं माना जा सकता था। इसके बावजूद जमीन के नीचे बनाई गई चिकित्सा सुविधा ने डॉक्टरों को अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया। इससे आंखों की नाजुक माइक्रो-सर्जरी को व्यवस्थित तरीके से पूरा करना संभव हुआ।मोतियाबिंद की समस्या में आंख का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है, जिससे धीरे-धीरे दिखाई देना कम हो सकता है। समय पर सर्जरी होने से मरीज की दृष्टि में काफी सुधार संभव होता है। सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टर और सर्जिकल सुविधाएं आसानी से उपलब्ध न होने के कारण मरीज कई बार समय पर इलाज नहीं करा पाते। ऐसे में विशेष चिकित्सा शिविर स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित होते हैं।
कैंप में केवल मोतियाबिंद तक उपचार सीमित नहीं रखा गया। रेटिना संबंधी प्रक्रियाओं के साथ कुछ मरीजों की मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी भी की गई। MIGS में अपेक्षाकृत छोटे चीरे के जरिए ग्लूकोमा के उपचार की कोशिश की जाती है। मरीज की स्थिति के आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टर यह तय करते हैं कि कौन-सी प्रक्रिया उपयुक्त होगी।‘ऑपरेशन दृष्टि’ के तहत आयोजित यह 10वां मेगा आई सर्जिकल कैंप था। इससे पहले भी इस पहल के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को नेत्र चिकित्सा उपलब्ध कराई गई है, लेकिन इस बार आयोजन की जगह ने इसे विशेष बना दिया। नियंत्रण रेखा पर इतने बड़े स्तर पर नेत्र सर्जरी शिविर आयोजित करना चिकित्सा और लॉजिस्टिक दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण था।
आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को इसके लिए आवश्यक उपकरणों और अन्य चिकित्सा सामग्री को दुर्गम इलाके तक पहुंचाना पड़ा। पहाड़ी क्षेत्र में चिकित्सा उपकरण पहुंचाने से लेकर उन्हें सुरक्षित तरीके से स्थापित करने और ऑपरेशन के लिए जरूरी व्यवस्था तैयार करने तक कई स्तर पर समन्वय की आवश्यकता पड़ी।इस अभियान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों के लिए बड़े शहरों में जाकर विशेषज्ञ चिकित्सा लेना कई बार मुश्किल होता है। दूरी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बुजुर्ग मरीजों के लिए यात्रा करना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्थानीय स्तर तक पहुंचने से मरीजों को बड़ी राहत मिलती है।
दो दिनों में 220 सर्जरी पूरी करना मेडिकल टीम के लिए भी एक बड़ी जिम्मेदारी थी। प्रत्येक मरीज की जांच, सर्जरी के लिए चयन, ऑपरेशन और उसके बाद आवश्यक निगरानी की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया।इस मेगा कैंप ने सीमावर्ती इलाकों में चिकित्सा सेवाओं की जरूरत को भी सामने रखा है। यहां रहने वाले लोगों को सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षित अस्पताल और सर्जिकल सुविधाएं उपलब्ध होना आपात स्थिति के साथ सामान्य चिकित्सा जरूरतों के लिए भी जरूरी है।
तंगधार में आयोजित ‘ऑपरेशन दृष्टि’ का यह कैंप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। संभावित गोलाबारी के खतरे के बीच जमीन के नीचे बने ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों ने दो दिनों तक काम करते हुए 220 लोगों की आंखों की सर्जरी पूरी की। मोतियाबिंद से लेकर रेटिना और ग्लूकोमा से जुड़ी प्रक्रियाओं तक, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं LoC के पास रहने वाले लोगों तक पहुंचाई गईं। यह अभियान बताता है कि कठिन भौगोलिक और सुरक्षा परिस्थितियों के बीच भी उचित तैयारी और सुरक्षित चिकित्सा ढांचे के जरिए विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं सीमावर्ती आबादी तक पहुंचाई जा सकती हैं।
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