Katra कटरा : जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री माता वैष्णो देवी धाम के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है। बता दें कि 26 अगस्त को हुए भीषण भूस्खलन के बाद बंद की गई माता वैष्णो देवी यात्रा को बुधवार, 17 सितंबर 2025 से दोबारा शुरू कर दिया गया है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर यह जानकारी साझा की और बताया कि यात्रा पूरी तरह मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी।
जानें बोर्ड ने क्या कहा?
श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा से जुड़ी जानकारी सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें और किसी भी अफ़वाह पर ध्यान न दें। यात्रा पर जाने के लिए भक्त आधिकारिक वेबसाइट maavaishnodevi.org पर अपनी बुकिंग कर सकते हैं। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर मौसम बिगड़ा या भारी बारिश हुई तो सुरक्षा कारणों से यात्रा दोबारा रोकनी पड़ सकती है।
24 अगस्त को हुआ था भीषण भूस्खलन
गौरतलब है कि 26 अगस्त को हुए इस भूस्खलन में 34 लोगों की मौत हो गई थी और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। सुरक्षा और मरम्मत कार्य पूरा करने के बाद 14 सितंबर से यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण उस समय फैसला टालना पड़ा। लगभग 22 दिनों के बाद आज फिर से श्रद्धालु माता रानी के दर्शन कर सकेंगे।
तीर्थयात्रियों के प्रदर्शन के दो दिन बाद फैसला
यात्रा बहाल करने का यह निर्णय उस समय आया है जब दो दिन पहले ही तीर्थयात्रियों ने कटरा के आधार शिविर में प्रदर्शन किया था। 14 सितंबर को महिलाएं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाणगंगा दर्शनी द्वार पर जुटे और ‘जय माता दी’ के नारे लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उन्हें आगे जाने से रोक दिया था।
2025 में कितने लोगों ने की माता वैष्णो देवी की यात्रा ?
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में अब तक लगभग 52 लाख 48 हजार 862 श्रद्धालु माता के दरबार में हाजिरी लगा चुके हैं। इनमें से करीब 2 लाख 34 हजार 994 यात्रियों ने हेलीकॉप्टर सेवा का उपयोग किया है।
इन चीजों को ले जाने पर पाबंदी
श्राइन बोर्ड ने यह भी दोहराया कि पवित्र गुफा में प्रवेश के दौरान कुछ वस्तुओं पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इनमें मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, पर्स, हैंडबैग, बेल्ट या किसी भी प्रकार की चमड़े की वस्तु शामिल हैं। सभी श्रद्धालुओं को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है।