श्रीनगर,  उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को लोक भवन में 'युवा संगम' के प्रतिभागियों से बातचीत की। इसमें महाराष्ट्र के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र शामिल थे, जिनका नेतृत्व IIT मुंबई कर रहा था। उपराज्यपाल ने भारत के भविष्य को आकार देने में सहयोग, मार्गदर्शन (मेंटरशिप) और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर जोर दिया।
छात्रों को संबोधित करते हुए, उपराज्यपाल ने कहा कि क्रांतिकारी विचार अक्सर केवल किसी एक व्यक्ति के प्रयासों का परिणाम नहीं होते। उन्होंने बताया कि सार्थक नवाचार (इनोवेशन) तब सामने आता है जब प्रतिभाशाली व्यक्ति, मार्गदर्शक और संस्थान विश्वास, समर्थन और सहयोग के एक साझा माहौल में एक साथ आते हैं। उपराज्यपाल ने कहा कि 'युवा संगम' की असली भावना अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमि के युवाओं के बीच आपसी संबंध बनाने में निहित है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिभा तब अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचती है, जब वह अन्य प्रतिभाशाली लोगों के साथ जुड़ती है, विचारों का आदान-प्रदान करती है और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को हल करने के लिए मिलकर काम करती है। मार्गदर्शन (मेंटरशिप) के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने नए विचारों को ऐसे व्यावहारिक समाधानों में बदलें, जिनसे समाज को लाभ हो।
उपराज्यपाल ने कहा कि 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच आपसी समझ और लोगों के आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि 'युवा संगम' एक महत्वपूर्ण मंच है, जो पर्यटन, परंपरा, विकास, तकनीक और लोगों के आपसी जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए युवाओं के बीच इस भावना को आगे बढ़ा रहा है।
उपराज्यपाल ने महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर, दोनों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जिक्र किया और कहा कि इन दोनों क्षेत्रों के छात्रों के बीच बातचीत से भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत को और बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। उन्होंने यहाँ आए छात्रों से यह भी कहा कि वे तेजी से बदलते जम्मू-कश्मीर के अपने अनुभवों को साझा करें। आज जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, स्टार्टअप, कृषि, हस्तशिल्प, तकनीक और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में नए अवसर मौजूद हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। यह अपने अतीत को पीछे छोड़कर एक जीवंत, प्रगतिशील और महत्वाकांक्षी क्षेत्र के रूप में उभर रहा है, जो उद्यमिता, शिक्षा और सांस्कृतिक पुनरुत्थान से प्रेरित है। “बंद और पत्थरबाजी के दिन अब लद गए हैं। आज, जम्मू-कश्मीर अपने फलते-फूलते स्टार्टअप्स के लिए चर्चा में है, जहाँ स्कूल, कॉलेज और कारोबार पूरे साल बिना किसी रुकावट के चल रहे हैं।
आज, पर्यटन, स्टार्टअप्स, कृषि, हस्तशिल्प, तकनीक और शिक्षा सहित हर क्षेत्र में तरक्की की अपार संभावनाएं हैं। जम्मू-कश्मीर के हजारों युवा उद्यमी सफलता की नई कहानियां लिख रहे हैं। श्रीनगर और जम्मू में अब जीवंत नाट्य, संगीत और कलात्मक माहौल देखने को मिलता है; यहाँ कला प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एक स्वाभाविक जगह बन गई है। मैं चाहता हूँ कि आप बदलते जम्मू-कश्मीर की इस तस्वीर को अपने साथ ले जाएं और अपने परिवार व दोस्तों को बताएं कि आपने यहाँ क्या देखा, क्या अनुभव किया और क्या सीखा,” उन्होंने कहा। उपराज्यपाल ने वैश्विक स्तर पर उभरती चुनौतियों, जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और गलत सूचनाओं (misinformation) के प्रसार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य उन समाजों का होगा जो विश्वास, सहयोग और युवाओं की ऊर्जा पर आधारित हैं।
उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस कार्यक्रम के बाद भी एक-दूसरे से जुड़े रहें, अपने ज्ञान का उपयोग समाज की भलाई के लिए करें और राष्ट्रीय एकता के दूत (ambassadors) के रूप में कार्य करें। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को भी प्रोत्साहित किया कि वे दीर्घकालिक अकादमिक साझेदारियां विकसित करें, जिससे दोनों संस्थानों को मजबूती मिले और वे राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे सकें। उपराज्यपाल ने कहा, “विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी बहुत जरूरी है। समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने के लिए अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग करें। खुद को राष्ट्रीय एकता का दूत मानें, ताकि हर युवा समाज को जोड़ने वाला एक सेतु (bridge-builder) बन सके।” महाराष्ट्र और NIT श्रीनगर के छात्रों के साथ बातचीत के दौरान, उपराज्यपाल ने सतत विकास (sustainable development) और मानवता की भलाई के लिए तकनीक के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “हर तकनीकी उपलब्धि अपने साथ बड़े फायदे और साथ ही कुछ उथल-पुथल भी लाती है। तकनीक में नैतिकता नहीं होती और वह खुद से सही-गलत के बीच फर्क नहीं कर सकती; इसलिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इंसानी नियंत्रण होना बहुत जरूरी है। हमारे युवाओं को इस डिजिटल बदलाव का नेतृत्व करना चाहिए, और साथ ही देश की विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा भी करनी चाहिए।”
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को सशक्त बनाने और केंद्र शासित प्रदेश में अब तक अनछुए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के समर्पित प्रयासों का भी जिक्र किया। सुनियोजित संवादों, संस्थागत दौरों, सांस्कृतिक गतिविधियों और व्यावहारिक सीखने के अवसरों के माध्यम से, 'युवा संगम चरण-VII' का उद्देश्य आपसी समझ को बढ़ावा देना, भारत की समृद्ध विविधता के प्रति सम्मान और सराहना को बढ़ाना, तथा 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' के युवा राजदूतों को तैयार करना है।
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