जम्मू-कश्मीर: लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। जम्मू के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जबकि कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में भी पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तेज बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं। तवी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, वहीं चिनाब नदी भी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। हालांकि, झेलम नदी का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे बताया जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू में बारिश का दौर अभी जारी रहने की संभावना है, जबकि कश्मीर में 24 जुलाई से मौसम में सुधार आने के संकेत हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है, खासकर नदी-नालों और पहाड़ी क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने को कहा गया है।
जम्मू के गांव मंगू चक में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल बाढ़ की स्थिति का सामना कर चुके ग्रामीण इस बार फिर डरे हुए हैं। ग्रामीणों ने एहतियात के तौर पर घरों का सामान छतों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। कई परिवार रात भी छतों पर गुजारने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष उनके घरों में करीब छह फीट तक पानी भर गया था, इसलिए इस बार पहले से ही तैयारी कर रहे हैं।
पिछले 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई है। कठुआ में सबसे ज्यादा 153 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा कठुआ बर्मल में 143, सांबा में 133, जम्मू में 62, गुलमर्ग में 55, कटरा में 58.5, बटोटे में 46, बारामूला में 38, पुंछ में 51, राजौरी में 44 और रामबन में 49 मिलीमीटर बारिश हुई है।
कश्मीर घाटी में भी बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर से लेकर दक्षिण कश्मीर तक कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। कई छोटे-बड़े नदी-नाले उफान पर हैं। गुरेज इलाके में बादल फटने की घटनाओं के बाद हालात और खराब हो गए हैं। इसके चलते आसपास के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया और कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। वहीं सुंदरबनी इलाके में भूस्खलन की घटना भी सामने आई है।
श्रीनगर के हारवन इलाके में दाछीगाम नाला खतरे के निशान को पार कर गया है। इसके बाद आसपास रहने वाले लोगों ने एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों का रुख करना शुरू कर दिया है। डल झील के आसपास के इलाकों हबक, नसीमबाग, गुलाब बाग और पांदछ में भी लोग अपने घरों का सामान ऊपरी मंजिलों पर शिफ्ट करते नजर आए।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, झेलम नदी का जलस्तर अभी खतरे के निशान से काफी नीचे है। अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल श्रीनगर शहर में बाढ़ का खतरा नहीं है, लेकिन लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। विभाग ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी हैं।
मौसम विभाग ने बताया कि श्रीनगर में सुबह 8:30 बजे तक 8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा काजीगुंड में 19.6, पहलगाम में 23.8, कुपवाड़ा में 13, कुकरनाग में 17, गुलमर्ग में 55, पुलवामा में 13.4, शोपियां में 11, बारामूला में 19 और बांडीपुर में 16.9 मिलीमीटर बारिश हुई।
मौसम विभाग के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद ने बताया कि गुरुवार 24 जुलाई से मौसम में धीरे-धीरे सुधार शुरू होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि बुधवार देर रात से बारिश की तीव्रता कम हो सकती है। हालांकि, उन्होंने पहाड़ी इलाकों और नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है। फिलहाल जम्मू-कश्मीर में बारिश से प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।