जम्मू: कश्मीरी प्रवासी अचल संपत्ति पुनःप्राप्ति संघ ने प्रवासी संपत्तियों से जुड़े मामलों में प्रशासनिक देरी, अतिक्रमण, अवैध कब्जे, संदिग्ध इंतकाल और संपत्ति हस्तांतरण तथा राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई है। संगठन के अनुसार 1990 के आसपास अशांत परिस्थितियों के दौरान कश्मीर से पलायन करने वाले परिवारों की संपत्तियों पर उनका कानूनी स्वामित्व समाप्त नहीं हुआ लेकिन कई मामलों में दशकों बाद भी उन्हें अपनी संपत्ति वापस पाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है। एमआईपीआरए के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 23 सितंबर को मंडलायुक्त कश्मीर से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। संगठन के संयोजक अवतार के. कौल के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को मंडलायुक्त ने आश्वासन दिया कि प्रशासन अपने अधिकार क्षेत्र में आवश्यक सहायता करेगा और संबंधित चिंताओं को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएगा।

मंडलायुक्त ने यह भी बताया कि कश्मीर घाटी में प्रवासियों की करीब 70 हजार कनाल भूमि की पहचान की जा चुकी है और जिले, तहसील तथा गांव स्तर पर इसका विवरण उपलब्ध है। एमआईपीआरए ने प्रवासी संपत्ति से जुड़े कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने, लंबित मामलों के समयबद्ध निपटारे, पुराने राजस्व रिकॉर्ड को सुरक्षित और डिजिटलीकरण करने, संदिग्ध इंतकाल व लेन-देन की जांच तथा अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

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