J&K: घटती झीलों को लेकर एनजीटी की चिंता बढ़ी

Update: 2026-04-23 09:21 GMT
JAMMU.जम्मू: जम्मू-कश्मीर में तेजी से सिकुड़ती और खत्म होती झीलों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। ट्रिब्यूनल ने इस पर्यावरणीय मुद्दे को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
सूत्रों के अनुसार, एनजीटी ने मीडिया रिपोर्ट्स और पर्यावरण विशेषज्ञों की चेतावनियों के आधार पर यह कदम उठाया है, जिनमें बताया गया था कि जम्मू-कश्मीर की कई महत्वपूर्ण झीलें प्रदूषण, अतिक्रमण और जलस्तर में गिरावट के कारण अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन झीलों का पर्यावरणीय महत्व अत्यंत अधिक है। ये न केवल जैव विविधता का संरक्षण करती हैं, बल्कि स्थानीय जलवायु संतुलन और पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। झीलों के सिकुड़ने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
एनजीटी ने अपने आदेश में संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि झीलों के संरक्षण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में क्या कार्ययोजना तैयार की जा रही है। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण, अतिक्रमण हटाने और जल संरक्षण उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने एनजीटी के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से झीलों की स्थिति खराब हो रही थी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। अब इस संज्ञान से उम्मीद है कि संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों ने भी चिंता जताई है कि झीलों के सूखने और सिकुड़ने से न केवल पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि पर्यटन उद्योग और आजीविका पर भी असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि झीलों के संरक्षण के लिए एक समग्र प्रबंधन योजना जरूरी है, जिसमें जल स्रोतों की सुरक्षा, गाद निकालने की प्रक्रिया, और अवैध निर्माण पर रोक शामिल हो।
 
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