Jammu.जम्मू: राजनीति में महिलाओं के आरक्षण को लेकर बहस फिर से गरमाई है। 2023 में महिलाओं के लिए आरक्षण संबंधी कानून बनने के बावजूद अब तक इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इस पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता बुक्कल ने सवाल उठाया कि आखिरकार महिलाओं को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा।
बुक्कल ने कहा कि यह समस्या केवल विधायी प्रक्रिया की देरी या तकनीकी कारणों से नहीं है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक बाधाओं के कारण भी महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि यह स्थिति महिलाओं के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए गंभीर चुनौती है।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना न केवल न्यायसंगत है, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए भी आवश्यक है। महिलाओं को स्थानीय निकायों, पंचायतों और अन्य संस्थाओं में बराबर प्रतिनिधित्व देना समाज और शासन दोनों के लिए लाभकारी होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि कानून बनने के बाद भी आरक्षण लागू न होना प्रशासनिक अक्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है। इसे सुधारने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को सक्रिय कदम उठाने की जरूरत है।
बुक्कल ने राज्य सरकार और प्रशासन से अपील की कि वे महिलाओं के आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करें और संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण केवल अधिकार का मामला नहीं है, बल्कि उनके निर्णय लेने की क्षमता और समाज में उनकी भागीदारी को बढ़ाने का अवसर भी है।
स्थानीय राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उनका कहना है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें सार्वजनिक जीवन में समान अवसर देना लोकतंत्र की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
कुल मिलाकर, 2023 में कानून बनने के बावजूद महिलाओं को आरक्षण न मिलना राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से गंभीर चुनौती है। बुक्कल और अन्य कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि इसे लागू करने के लिए सतत प्रयास और जिम्मेदार कदम उठाना आवश्यक है। इससे न केवल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा होगी, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनकी भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।