Jammu: पूर्णिमा पर दरबार में सद्गुरु जी ने बताया सत्यनाम का महत्व

Update: 2025-11-10 10:23 GMT

जम्मू: साहिब बंदगी के संत सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने आज पूर्णिमा के अवसर पर राँजड़ी, जम्मू में अपने प्रवचनों की अमृतवर्षा से संगत को निहाल करते हुए कहा कि सभी धर्म शास्त्र एक ही बात कह रहे हैं कि एक ही ब्रह्म की उपासना करो। साहिब कह रहे हैं कि बिरला संत परम गति को जानता है। साहिब कह रहे हैं कि मैं हर युग में आया। कोई कोई हंस हमारा है। बार बार साहिब वाणी में कह रहे हैं कि नाम का सुमिरन करो। वो नाम साधारण नहीं है। जन्म मरण का रोग नाश करता है नाम। जैसे बीरारी हो जाती है तो दवा देते हैं। वो दवा उस बीमारी से संबंधित कीटाणुओं को साफ करती है। जैसे नाम हृदय में आता है, पाप का नाश हो जाता है। नाम के बिना आदमी का हृदय शुद्ध ही नहीं हो सकता है।

थोड़ा अतीत में जाओ, आप निष्पक्ष होकर सोचना कि आपका हृदय कैसा था। सही गलत का पता नहीं चल रहा था। अन्दर के दुश्मन अपना खेल खेले जा रहे थे। जब क्रोध आता था तो आप विध्वंस मचा देते थे। जब काम आता था तो नचाता था। हैं ये सब अभी भी, पर अब कंट्रोल में हैं। उनमें नाम के बाद इतनी ताकत नहीं रह जाती है कि विध्वंस मचा सकें। पहले जो चाहते थे, कर सकते थे। पर अब इनका जोर नहीं चल रहा है। जहाँ नाम होता है, वहाँ काम नहीं हो सकता है। कहने का मतलब है कि वो नाम आपको पार कर देगा। हृदय को शुद्ध अगर कोई कर सकता है तो वो नाम है। नाम के पहले की स्थित और बाद की स्थित में आप अपने को तौलेंगे तो जमीन आसमान का फर्क मिलेगा।

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