जम्मू। शहरीकरण और लगातार बढ़ते कंक्रीट के फैलाव के बीच गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए जम्मू नगर निगम ने एक नई पहल शुरू की है। निगम अब वर्षा जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसके तहत शहर के व्यस्त बिक्रम चौक-गांधीनगर फ्लाईओवर पर गिरने वाले बारिश के पानी को बर्बाद होने से बचाकर जमीन के भीतर पहुंचाया जाएगा।

योजना के तहत फ्लाईओवर से बहने वाले बारिश के पानी को विशेष पाइपों और फिल्टरेशन पिट्स के माध्यम से सीधे भूजल स्रोतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे जमीन के अंदर मौजूद जलभृत यानी एक्विफर को रीचार्ज करने में मदद मिलेगी और भविष्य में पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकेगी।

जम्मू नगर निगम ने इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। फिलहाल यह काम महिला कॉलेज गांधीनगर के पास फ्लाईओवर के निचले हिस्से में तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए जा रहे रीचार्ज पिट्स बारिश के पानी को साफ करके जमीन में पहुंचाने का काम करेंगे।

बिक्रम चौक से गांधीनगर तक बना यह फ्लाईओवर करीब 1.3 किलोमीटर लंबा है। इसके नीचे पहले से ही वर्टिकल गार्डन और हरित पट्टियां विकसित की गई हैं। निगम अब इसी ग्रीन स्ट्रिप में वर्षा जल संरक्षण के लिए विशेष रीचार्ज पिट्स तैयार कर रहा है।

शहरों में बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण जमीन पर पानी के प्राकृतिक रिसाव की क्षमता कम होती जा रही है। सड़क, भवन और अन्य कंक्रीट संरचनाओं के कारण बारिश का पानी जमीन में जाने के बजाय नालियों के माध्यम से बहकर निकल जाता है। इससे भूजल स्तर लगातार प्रभावित हो रहा है।

नगर निगम की इस परियोजना का उद्देश्य इसी समस्या का समाधान करना है। बारिश के दौरान फ्लाईओवर और आसपास के क्षेत्र से आने वाले पानी को एकत्र कर उसे फिल्टर किया जाएगा और फिर जमीन के अंदर पहुंचाया जाएगा।

अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं भविष्य में जल संकट को कम करने में मददगार साबित हो सकती हैं। वर्षा जल को संरक्षित करने से न केवल भूजल स्तर में सुधार होगा, बल्कि शहर में पानी की उपलब्धता को भी मजबूत किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग आज के समय की जरूरत बन गई है। बढ़ते शहरीकरण के कारण प्राकृतिक जल स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में बारिश के पानी को संरक्षित करना पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।

जम्मू नगर निगम की योजना शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो इसे दूसरे व्यस्त इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।

फ्लाईओवर के नीचे विकसित ग्रीन स्ट्रिप का उपयोग वर्षा जल संरक्षण के लिए करना एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है। इससे एक ओर जहां हरियाली बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर पानी को जमीन में पहुंचाने का काम भी होगा।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि परियोजना में तकनीकी मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। फिल्टरेशन पिट्स में ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे गंदगी और अन्य अशुद्धियां जमीन के अंदर न पहुंचें।

शहर में भूजल स्तर गिरने की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है। गर्मियों के दौरान कई इलाकों में पानी की मांग बढ़ जाती है, जबकि भूजल स्रोतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

ऐसे में वर्षा जल संरक्षण की यह पहल जम्मू के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे बारिश के पानी का बेहतर उपयोग होगा और प्राकृतिक जल स्रोतों को मजबूती मिलेगी।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बड़े प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि छोटे स्तर पर भी वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत है। घरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अपनाने से लंबे समय में बड़ा फायदा मिल सकता है।

जम्मू नगर निगम की यह परियोजना शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। उम्मीद है कि इसके सकारात्मक परिणाम आने वाले वर्षों में दिखाई देंगे।

फिलहाल फ्लाईओवर क्षेत्र में रीचार्ज पिट्स बनाने का काम जारी है। परियोजना पूरी होने के बाद बारिश के पानी को नालियों में बहने से रोककर उसे भूजल स्तर सुधारने में उपयोग किया जाएगा।

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