JAMMU.जम्मू: इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के प्रमुख ने स्मार्ट मीटर और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लेकर जम्मू-कश्मीर सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ये नीतियां आम जनता और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हैं और इनसे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
एक बयान में आईवाईसी प्रमुख ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस योजना से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है और बिजली बिलों में अनियमितता की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरती जाए और लोगों की चिंताओं का समाधान किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि नई पेंशन प्रणाली कर्मचारियों के भविष्य को असुरक्षित बनाती है, जबकि पुरानी पेंशन योजना उन्हें आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करती थी। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में ओपीएस को फिर से लागू किया गया है, ऐसे में जम्मू-कश्मीर में भी इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
आईवाईसी प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों और आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि इन मुद्दों का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा।
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और विभिन्न संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। कुछ कर्मचारी संगठनों ने भी पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग को दोहराया है।
वहीं, सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर और पेंशन से जुड़े सभी निर्णय व्यापक नीति और दीर्घकालिक योजनाओं को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम बिजली वितरण को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद करता है, जबकि पेंशन से जुड़े मुद्दे आर्थिक और वित्तीय संतुलन से जुड़े होते हैं, जिन पर सोच-समझकर निर्णय लिया जाता है।
इस बीच, आईवाईसी प्रमुख ने यह भी कहा कि उनका संगठन जनता और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वे इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे।
इस प्रकार स्मार्ट मीटर और पुरानी पेंशन योजना को लेकर उठी यह बहस जम्मू-कश्मीर में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है, जिस पर आने वाले समय में और चर्चा होने की संभावना है।