श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में ए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा आधिकारिक बैठक के दौरान महिला अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो का स्वतः संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वीडियो की सत्यता की जांच करने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक तथा कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। इसके साथ ही सात दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है।यह मामला जम्मू-कश्मीर के श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन से जुड़ा है। उन पर आधिकारिक समीक्षा बैठक के दौरान एक महिला जूनियर अधिकारी के साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और धमकाने का आरोप लगा है।
आधिकारिक बैठक में महिला अधिकारी से कथित बदसलूकी
जानकारी के अनुसार, यह घटना 14 अक्टूबर को मिशन युवा की समीक्षा बैठक के दौरान हुई। बैठक में श्रम एवं रोजगार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल थे।वायरल वीडियो में आईएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन कथित तौर पर महिला अधिकारी बेनीश वानी से नाराज होकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं।बेनीश वानी जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (JKAS) की अधिकारी हैं और गांदरबल में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान विभागीय कार्यों को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी बीच दोनों अधिकारियों के बीच बहस शुरू हो गई।
महिला अधिकारी को निलंबित करने की धमकी का आरोप
वायरल वीडियो में कथित तौर पर महिला अधिकारी के साथ अपमानजनक व्यवहार किए जाने के अलावा उन्हें निलंबित करने की धमकी देने की बात भी सामने आई है।जानकारी के मुताबिक, महिला अधिकारी ने वरिष्ठ अधिकारी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद विवाद और बढ़ गया।इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार और कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा को लेकर सवाल उठने लगे।हालांकि, पूरे मामले में संबंधित अधिकारी की जवाबदेही और आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच के आधार पर ही होगा।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।आयोग ने प्रशासन से वीडियो की सत्यता की पुष्टि करने और घटना की निष्पक्ष जांच कराने को कहा है।पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।आयोग ने कहा कि किसी भी महिला अधिकारी को सुरक्षित, सम्मानजनक और गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराना आवश्यक है।
सात दिनों के भीतर मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
महिला आयोग ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।आयोग ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न, प्रताड़ना और पेशेवर प्रतिशोध रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय अपनाने की आवश्यकता भी जताई है।इसके अलावा महिला अधिकारी को आवश्यक सुरक्षा और सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि शिकायत या विवाद के कारण उन्हें किसी प्रकार की प्रतिकूल कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी शुरू कराई जांच
इस बीच जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी मामले की औपचारिक जांच का आदेश दिया है।सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनदीप कौर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें पूरे घटनाक्रम की जांच कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी घटना पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से इस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जाती।मुख्यमंत्री ने महिला अधिकारी के खिलाफ किसी भी तरह की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होने देने का भरोसा दिया है।
कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा को लेकर उठे सवाल
इस घटना के बाद सरकारी कार्यालयों में वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों के बीच व्यवहार तथा महिलाओं के सम्मान का मुद्दा चर्चा में आ गया है।राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि अधिकारों का दुरुपयोग और कार्यस्थल पर अपमानजनक व्यवहार गंभीरता से लिया जाना चाहिए।फिलहाल जम्मू-कश्मीर प्रशासन की जांच और राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
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