ऊधमपुर। जिले में डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद ने रोकथाम के प्रयास तेज कर दिए हैं। शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें लोगों को डेंगू से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक कर रही हैं। दूसरी ओर नगर परिषद की ओर से विभिन्न वार्डों और संवेदनशील इलाकों में फॉगिंग अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2026 में अब तक जिले में डेंगू के 16 मामले सामने आए हैं, जिसके बाद विभागीय स्तर पर निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग का जोर डेंगू के नए मामलों की समय पर पहचान और संक्रमण को फैलने से रोकने पर है। इसके लिए संदिग्ध मरीजों की जांच के साथ लोगों को अपने घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने के लिए जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि डेंगू की रोकथाम में प्रशासनिक प्रयासों के साथ आम लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है।

शहर के साथ गांवों में पहुंच रहीं टीमें

स्वास्थ्य विभाग की टीमें शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीण इलाकों में भी जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को डेंगू फैलने के कारणों और उससे बचाव के तरीकों के बारे में बताया जा रहा है।

लोगों को घरों में रखे कूलर, पानी की टंकियों, गमलों, पुराने टायर और ऐसे दूसरे स्थानों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है, जहां लंबे समय तक पानी जमा रह सकता है। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ जमा पानी में भी पनप सकता है, इसलिए नियमित रूप से ऐसे स्थानों की सफाई महत्वपूर्ण है।

टीमें लोगों को बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर खुद से इलाज करने के बजाय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए भी जागरूक कर रही हैं।

संवेदनशील इलाकों में फॉगिंग

नगर परिषद की टीमों ने भी मच्छरों के नियंत्रण के लिए अभियान तेज किया है। विभिन्न वार्डों और संवेदनशील इलाकों में फॉगिंग की जा रही है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां मच्छरों का प्रकोप अधिक होने की आशंका है।

इसके साथ ही साफ-सफाई व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है। बरसात के मौसम में खाली प्लॉट, नालियों और घरों के आसपास पानी जमा होने की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे स्थान मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं।

नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त अभियान का उद्देश्य मच्छरों के प्रजनन स्थलों को कम करने के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।

अब तक डेंगू के 16 मामले

विभागीय जानकारी के मुताबिक वर्ष 2026 में अब तक जिले में डेंगू के कुल 16 मामले सामने आए हैं। मामलों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।

समय रहते जांच और रोकथाम अभियान चलाए जाने से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि संदिग्ध मरीजों की जल्द पहचान हो और आवश्यकता के अनुसार उन्हें उपचार उपलब्ध कराया जाए।

डेंगू के मामलों की निगरानी के साथ प्रभावित या संवेदनशील क्षेत्रों में रोकथाम गतिविधियां भी बढ़ाई जा रही हैं। यदि किसी इलाके में मामला सामने आता है तो उसके आसपास विशेष सतर्कता बरतना संक्रमण की श्रृंखला को रोकने में उपयोगी हो सकता है।

GMC में जांच प्रक्रिया तेज

डेंगू के संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान सुनिश्चित करने के लिए जीएमसी में जांच प्रक्रिया को भी तेज किया गया है। इसका उद्देश्य मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए अनावश्यक इंतजार से बचाना और पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में जल्द उपचार शुरू करना है।

बरसात और उसके बाद के समय में बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। हर बुखार डेंगू नहीं होता, इसलिए सही जांच बेहद महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य विभाग इसी कारण संदिग्ध मरीजों की चिकित्सकीय जांच पर जोर दे रहा है।

समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीज की स्थिति पर बेहतर तरीके से नजर रखी जा सकती है और आवश्यक उपचार दिया जा सकता है।

घरों में जमा पानी बन सकता है खतरा

डेंगू से बचाव के लिए लोगों को अपने घर और आसपास साफ-सफाई रखने की जरूरत है। पानी रखने वाले बर्तनों और टंकियों को ढककर रखना चाहिए। कूलर में लंबे समय तक पानी जमा नहीं रहने देना चाहिए और उपयोग न होने की स्थिति में उसे खाली और साफ रखना बेहतर है।

घर की छत या आसपास रखी अनुपयोगी वस्तुओं में बारिश का पानी जमा होने पर उसे भी निकालना जरूरी है। छोटी मात्रा में जमा पानी भी मच्छरों के प्रजनन का स्थान बन सकता है।

पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने और मच्छरों से बचाव के दूसरे सुरक्षित उपाय अपनाने से भी जोखिम कम किया जा सकता है।

तेज बुखार को नजरअंदाज न करें

डेंगू के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है। तेज बुखार के साथ सिरदर्द, शरीर या जोड़ों में दर्द, मतली और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, रक्तस्राव या अत्यधिक कमजोरी जैसे चेतावनी संकेत सामने आ सकते हैं।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

लोगों की भागीदारी जरूरी

स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद के प्रयासों के साथ डेंगू नियंत्रण में आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। यदि प्रत्येक परिवार अपने घर और आसपास मच्छरों के प्रजनन वाले स्थानों को खत्म करे तो संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

फॉगिंग तत्काल मच्छर नियंत्रण के उपायों में शामिल हो सकती है, लेकिन लंबे समय के लिए पानी जमा होने से रोकना और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करना बेहद जरूरी है।

फिलहाल जिले में स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद ने संयुक्त अभियान तेज कर दिया है। वर्ष 2026 में सामने आए 16 मामलों को देखते हुए विभाग किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। शहर से गांव तक जागरूकता, संवेदनशील क्षेत्रों में फॉगिंग और जीएमसी में जांच प्रक्रिया तेज कर डेंगू के प्रसार को रोकने की कोशिश की जा रही है।

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